अंबिकापुर में किसानों का अनोखा सत्याग्रह: 13 किमी पैदल हांककर 50 से अधिक मवेशियों को कलेक्ट्रेट ले आए ग्रामीण
कलेक्टर चैंबर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने मवेशियों को बैठाकर किसान भी वहीं धरने पर बैठ गए, जिससे कलेक्ट्रेट में हड़कंप मच गया। किसानों का कहना है क...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 01:50:22 PM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 01:50:22 PM (IST)
कलेक्ट्रेट मुख्य द्वार पर मवेशियों को लेकर डटे रहे किसान।HighLights
- 50 मवेशी 13 किमी पैदल हांककर कलेक्ट्रेट ले आए किसान।
- परसा-देवगढ़ में 50 एकड़ फसल बर्बाद, निगम पर आरोप।
- कलेक्ट्रेट मुख्य द्वार पर बैठे मवेशी और डटे रहे किसान।
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: अंबिकापुर शहर के बेसहारा मवेशियों ने नजदीक के गांवों में किसानों की फसलें बर्बाद की तो किसानों ने उन मवेशियों को ही हांककर कलेक्ट्रेट पहुंचा दिया।गुरुवार को ग्राम पंचायत परसा, देवगढ़ के नाराज किसानों ने लगभग 13 किलोमीटर तक 50 से अधिक बेसहारा मवेशियों को पैदल हांकते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करा दिया। कलेक्टर चैंबर से पहले मुख्य प्रवेश द्वार के सामने ही मवेशियों को बैठा दिया और किसान भी वहीं डट गए।
इस नजारे को देखकर अधिकारी-कर्मचारी अचरज में पड़ गए।किसानों की अगुवाई परसा के सरपंच मनोज सिंह और देवगढ़ के सरपंच सन्यासी कुमार कर रहे थे। किसानों का आरोप है कि नगर निगम अंबिकापुर क्षेत्र में विचरण करने वाले बेसहारा मवेशियों को काऊ कैचर में भरकर सुनियोजित तरीके से आसपास के गांवों में छोड़ दिया जाता है। इसका कारण है कि निगम के पास मवेशियों को रखने की कोई व्यवस्था नहीं है।
परसा के किसानों ने कहा कि सिर्फ हमारे गांव में ही मवेशियों ने लगभग 50 एकड़ फसल बर्बाद कर दी। जब हमने जानकारी जुटाई तो पता चला कि इनमें से एक भी मवेशी गांव के किसी व्यक्ति की नहीं है। सब शहर से लाकर छोड़े गए हैं।दोपहर में कलेक्ट्रेट परिसर का नजारा बिल्कुल अलग था। मुख्य द्वार के सामने बड़ी संख्या में गाय, बैल और बछड़े बैठी हुई थीं। सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशियों को पकड़कर लाए किसान भी उनके साथ वहीं बैठे थे। अभी तक कलेक्टर से किसानों की मुलाकात नहीं हो पाई है, लेकिन किसान साफ कह रहे हैं जब तक बेसहारा मवेशियों की व्यवस्था नहीं होती, हम यहीं रहेंगे।
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गांव-गांव में एक ही कहानी
किसानों ने बताया कि ये समस्या सिर्फ परसा की नहीं है। शहर से लगे देवगढ़, रजपुरी, करमहा, हसूली, भकुरा,नवापारा, खैरबार,श्रीगढ़,नवागढ़ सहित आसपास के गांवों में भी अंबिकापुर शहर के मवेशियों को छोड़ा जा रहा है। शहर के बेसहारा मवेशियों को गांव में छोड़ देने की परंपरा ने किसानों को आर्थिक रूप से तोड़ दिया है। ऊपर से शहर की सड़कों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक मवेशियों का जमावड़ा है। इससे सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पशुपालकों की मनमानी के कारण आम लोग भी परेशान हैं।
नगर निगम के पास नहीं है समुचित व्यवस्था
किसानों ने बताया कि अंबिकापुर शहर में नगर निगम का कांजी हाउस है, लेकिन उसकी क्षमता इतनी कम है कि यहां मवेशियों को रख पाना संभव नहीं। दूसरी कोई व्यवस्था आज तक विकसित नहीं की गई।जिले में गोधाम के नाम पर सीतापुर के सोनतराई में एक गोधाम की स्वीकृति मिली है, लेकिन उसका संचालन शुरू नहीं हुआ। पहले के वर्षों में जो गौठान संचालित थे, वे भी बंद हो चुके हैं। किसानों की मांग है कि जिला प्रशासन बेसहारा मवेशियों के लिए तुरंत समुचित प्रबंध करे ताकि किसानों की फसलें बर्बाद न हों। लापरवाह पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई हो जो मवेशियों को सड़कों पर आवारा छोड़ देते हैं।किसानों ने कहा कि अब प्रशासन को तय करना है कि या तो मवेशियों के लिए स्थायी व्यवस्था करे, या फिर रोजाना कलेक्ट्रेट में हांककर लाए गए मवेशियों को रखने की व्यवस्था करे।