
नईदुनिया न्यूज, बिश्रामपुर: जिस थाने की दीवार पर बिश्रामपुर पुलिस के गौरवशाली इतिहास की कहानी दर्ज है, उसी थाने का मौजूदा भवन अब बदहाली की कहानी कह रहा है। लाखों रुपये की लागत से निर्मित बिश्रामपुर पुलिस थाने का दो मंजिला भवन महज 12 साल में ही रखरखाव और समय-समय पर मरम्मत के अभाव में जर्जर होने लगा है।
भवन की छत से जगह-जगह प्लास्टर झड़कर गिर रहा है और कई हिस्सों में छत की सरिया तक दिखाई देने लगी है। दीवारों में सीलन के साथ दरारें निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही हैं। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण पुलिसकर्मियों और विवेचकों को काम करने में परेशानी हो रही है।
थाने में विवेचना और पुलिस संबंधी जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित रखना चुनौती बन गया है। बारिश के दौरान छत से टपकने वाले पानी से बचाने के लिए विवेचक अपनी टेबल पर रखी फाइलों और दस्तावेजों को ढककर रखने मजबूर हैं। ऐसे में कभी भी महत्वपूर्ण दस्तावेज खराब होने का खतरा बना रहता है। ऊपरी मंजिल में भी जगह-जगह पानी का रिसाव दिखाई दे रहा है। वहीं शौचालयों की बदहाल स्थिति पुलिसकर्मियों के लिए अलग परेशानी का कारण बनी हुई है।
बिश्रामपुर थाने के इतिहास को दर्शाने वाली दीवार पर दर्ज जानकारी के अनुसार, वर्ष 1965 से पहले बिश्रामपुर क्षेत्र जयनगर थाने के अंतर्गत आता था। वर्ष 1965 में जयनगर थाने के अंतर्गत बिश्रामपुर चौकी स्थापित की गई थी। कोयला क्षेत्र के विस्तार और कानून-व्यवस्था की जरूरतों को देखते हुए 24 अप्रैल 1996 को बिश्रामपुर चौकी का थाने के रूप में उन्नयन किया गया।
प्रारंभ में थाना हनुमान मंदिर के पास एसईसीएल के भवन में संचालित होता था। इसके बाद वर्तमान दो मंजिला थाना भवन का निर्माण कराया गया। 26 जनवरी 2014 को तत्कालीन गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने नए थाना भवन का लोकार्पण किया था। लेकिन निर्माण के करीब 12 वर्ष बाद ही भवन की हालत सवाल खड़े कर रही है।
पुलिस थाने जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण शासकीय भवन में छत का प्लास्टर गिरना, सरिया बाहर आना और बारिश का पानी अंदर टपकना गंभीर स्थिति है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि समय रहते भवन की मरम्मत और जल रिसाव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में परेशानी और बढ़ सकती है।
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