Ambikapur News उत्तर छत्तीसगढ़ में मानसून सक्रिय, हो रही झमाझम वर्षा
उत्तरी छत्तीसगढ़ इलाके में देर से सक्रिय हुए मानसून की अच्छी वर्षा से किसानों को बड़ी राहत मिली है। शनिवार को समूचे सरगुजा संभाग में ...और पढ़ें
By Yogeshwar SharmaEdited By: Yogeshwar Sharma
Publish Date: Sun, 25 Jun 2023 09:44:10 PM (IST)Updated Date: Sun, 25 Jun 2023 09:44:10 PM (IST)

अंबिकापुर । उत्तरी छत्तीसगढ़ इलाके में देर से सक्रिय हुए मानसून की अच्छी वर्षा से किसानों को बड़ी राहत मिली है। शनिवार को समूचे सरगुजा संभाग में मानसून की दस्तक के साथ अंबिकापुर में दो दिन के भीतर 36 मिमी से अधिक वर्षा हो चुकी है। रविवार को दिन में हल्की बूंदाबांदी होती रही लेकिन शाम को वर्षा तेज हो गई।
मानसूनी हवा के प्रवेश के साथ ही गर्मी के तेवर भी ढीले पड़ गए हैं। लंबे समय से मानसून की प्रतीक्षा कर रहे किसान अब धान की खेती में जोरशोर से भिड़ गए हैं। धान की नर्सरी के लिए तैयारी की जा रही है। खेतों में जुताई-बोवाई के काम में तेजी आ गई है। खाद-बीज की दुकानों में छाया सन्नाटा भी दूर हो गया है। रविवार बाजार के दिन शहर के अधिकांश खाद-बीज की दुकानों में किसानों की भीड़ दिखी। विपरज्वाय तूफान के कारण इस बार करीब दस दिन के विलंब से मानसून की गतिविधि शुरू हुई। इस दौरान भीषण गर्मी से लोग बेहाल रहे। पहली बार ऐसा हुआ कि नौतपा से ज्यादा तीखी धूप व गर्मी का एहसास लोगों को आषाढ़ माह के दूसरे पखवाड़े में हुआ। मौसम विज्ञानी एएम भट्ट के अनुसार मानसून छत्तीसगढ़ में पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। इसके प्रभाव से 27 जून तक सरगुजा संभाग में अच्छी वर्षा की संभावना है।
छत्तीसगढ़ के शिमला मैनपाट में वर्षा काल शुरू होने के साथ मनमोहक नजारा यहां की खूबसूरती को और बढ़ा रहा है। ऐसा लग रहा है कि बादल आसमान से जमीन पर उतर आए हैं। रविवार को परपटिया एवं मेहता प्वाइंट के आसपास सुबह ऐसा नयनाभिराम दृश्य देख लोगों ने अपने मोबाइल में इसका वीडियो-फोटो निकाल इंटरनेट मीडिया में पोस्ट कर दिया। देखते ही देखते यह तस्वीर एवं वीडियो वायरल हो गया। मैनपाट में इस तरह का नजारा सामने आने के साथ ही पर्यटकों की भीड़ बढ़ गई है। रविवार को अवकाश के कारण बड़ी संख्या में लोग मैनपाट घूमने पहुंचे।
मानसूनी हवा इस तरह करती है प्रवेश
मौसम विज्ञानी एएम भट्ट के अनुसार मार्च-अप्रैल में आस्ट्रेलिया के पास समुद्र में एक बड़ा अत्यधिक दबाव का क्षेत्र बनने लगता है। एक बात ध्यान में रखना आवश्यक है कि वायु का प्रवाह हमेशा उच्च वायुदाब क्षेत्र से निम्न वायुदाब क्षेत्र की ओर होता है। आस्ट्रेलिया हाई की हवाएं भारतीय उपमहाद्वीप की ओर बढ़ने लगती हैं क्योंकि यहां वायुदाब कम रहता है। आगे बढ़ती हुई ये हवाएं दक्षिणी गोलार्ध में ही रह कर मई के मध्य तक ओमान, मस्कट की ऊंची खाड़ी से टकरा जाती हैं। टकराने के बाद इनका विचलन बायीं ओर होता है जिससे वे विषुवत रेखा के उत्तरी गोलार्ध में चली आती हैं और पृथ्वी के घूर्णन के कोरियोलिस बल के कारण 180 डिग्री पर मुड़ती हुई वापस चल पड़ती हैं। यहां उत्तरी गोलार्ध में इनका विचलन दाईं ओर होकर दक्षिण भारत के केरल प्रांत की ओर हो जाता है। एक जून के आसपास ये हवाएं केरल के मुहाने भारत में प्रवेश करती हुई आगे बढ़ती हैं। इन्हीं नम तीव्र हवाओं को हम मानसून कहते हैं। ये हवाएं भारत के लिए वरदान सिद्ध होती हैं। यही हवा मानसूनी वर्षा के रूप में खेती के लिए प्राणदायिनी साबित होती है। चूंकि भारत में इन मानसूनी हवाओं का प्रवेश दक्षिण- पश्चिम दिशा से होता है, इसलिए हम जून में आने वाले मानसून को दक्षिण-पश्चिम मानसून कहते हैं।
बलरामपुर में सर्वाधिक, उदयपुर में सबसे कम वर्षा
सरगुजा संभाग की सभी तहसीलों में अच्छी वर्षा हुई है। सबसे ज्यादा वर्षा बलरामपुर मुख्यालय में 40 मिमी तो राजपुर में 38.5 मिमी, उदयपुर में सबसे कम 2.7 मिमी व लखनपुर 4.3 मिमी वर्षा हुई है। संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में शुक्रवार को 17.6 मिमी व शनिवार शाम साढ़े पांच बजे तक 18.8 मिमी वर्षा हुई। इस दौरान अधिकतम तापमान 28.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24.0 डिग्री रिकार्ड किया गया।