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बलरामपुर में अनोखा सरकारी स्कूल: न तो बिल्डिंग, न ही एक भी छात्र; फिर भी दो शिक्षकों की है पोस्टिंग

बलरामपुर जिले के बरदबंधा गांव में एक ऐसा सरकारी प्राइमरी स्कूल है जहां एक भी बच्चा नहीं है, लेकिन दो शिक्षक पदस्थ हैं।

By Asim Sen GuptaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Fri, 25 Sep 2026 02:31:28 PM (IST)Updated Date: Fri, 25 Sep 2026 02:42:45 PM (IST)
बलरामपुर में अनोखा सरकारी स्कूल: न तो बिल्डिंग, न ही एक भी छात्र; फिर भी दो शिक्षकों की है पोस्टिंग
बलरामपुर के बरदबंधा में बिना बच्चों का स्कूल (AI Generated Image)

HighLights

  1. पुराना भवन जर्जर होने से तोड़ा गया
  2. 2022 में 11 लाख मंजूर, निर्माण नहीं हुआ
  3. किचन शेड में पढ़ते थे 3 बच्चे, अब जीरो

नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। बलरामपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था की अजीब तस्वीर सामने आई है। विकासखंड बलरामपुर के ग्राम पंचायत बरदबंधा में एक ऐसा सरकारी प्राइमरी स्कूल है, जहां एक भी बच्चा नहीं है, लेकिन दो शिक्षक पदस्थ हैं। स्कूल भवन नहीं होने से ये पाठशाला सूनी पड़ी है। पिछले सत्र में पढ़ने वाले 3 बच्चों को भी उनके माता-पिता ने दूसरे स्कूल में भर्ती करा दिया है। बिना बच्चों के कागजों में ये प्राइमरी पाठशाला चल रही है।

3-4 साल पहले टूटा भवन, 11 लाख मंजूर फिर भी नहीं बना

शासकीय प्राथमिक शाला बरदबंधा का पुराना भवन 3-4 साल पहले जर्जर होने के कारण तोड़ दिया गया था। नए भवन के लिए 2022 में करीब 11 लाख रुपये की मंजूरी भी मिल गई। निर्माण का सामान भी गांव में पहुंचा, लेकिन फिर पता नहीं क्या हुआ, सामान उठा लिया गया और भवन आज तक नहीं बन पाया। नींव तक नहीं खोदी गई।


किचन शेड में लगती थी क्लास, अब एक भी बच्चा नहीं

भवन नहीं तो पढ़ाई कहां हो? बच्चों की क्लास मिड-डे मील बनाने वाले किचन शेड में लगने लगी। उसी छोटे से कमरे में खाना भी बनता और उसी में बच्चे पढ़ते। पिछले सत्र में जैसे-तैसे कक्षा पहली में 2 और कक्षा दूसरी में 1, कुल 3 बच्चे पढ़ रहे थे। अव्यवस्था से परेशान होकर इन तीनों ने भी इस सत्र में अपना नाम कटवा लिया। इस सत्र में अगस्त महीने तक शिक्षक बच्चों के एडमिशन का इंतजार करते रहे, लेकिन एक भी बच्चा एडमिशन लेने नहीं पहुंचा। नतीजा ये हुआ कि इस सत्र में स्कूल बिना बच्चों का हो गया।

दो शिक्षक पदस्थ, एक लंबे समय से नहीं आ रहे

स्कूल में एक प्रधान पाठक और एक शिक्षक, कुल दो पदस्थ हैं। गांव वालों का आरोप है कि इनमें से एक शिक्षक लंबे समय से स्कूल नहीं आ रहे। इस पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजू कनौजिया ने बताया कि संबंधित शिक्षक कैंसर से पीड़ित हैं और लंबे समय से नहीं आ रहे। उन्होंने माना कि 2022 में भवन की मंजूरी मिली थी, लेकिन निर्माण नहीं हो पाया। अब प्रधान पाठक को प्राइमरी शाला धनेशपुर में अटैच किया जाएगा और शासन के निर्देश के मुताबिक आगे की कार्रवाई होगी।

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ग्रामीणों ने कई बार लगाई गुहार, जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि भवन के लिए कई बार अधिकारियों को बताया गया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अगर समय पर भवन बन जाता तो बच्चों को दूसरी जगह नहीं जाना पड़ता और स्कूल की रौनक बनी रहती। गांव के बच्चे अब दूसरे गांव के स्कूलों में जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि 2022 में मंजूर हुए भवन के पैसे का क्या हुआ, इसकी जांच कराई जाए और जल्द निर्माण कराया जाए।