
प्रतापपुर(नईदुनिया न्यू)सूरजपुर जिले के प्रतापपुर तहसील अंतर्गत ग्राम केरता की महान नदी के पुल से एक किलोमीटर की दूरी पर एक्सीवेटर व पोकलेन मशीन द्वारा प्रतिदिन रेत का खनन व परिवहन किया जा रहा है। यहां खनिज विभाग द्वारा निर्धारित रेत के खनन, भंडारण व परिवहन संबंधी किसी भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। मगर सब कुछ जानते हुए भी खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई तो दूर जांच के लिए भी नहीं पहुंचते है।
बता दें कि बारिश के मौसम में उत्तर प्रदेश में रेत के खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध लग जाता है जिसके कारण वहां रेत के दाम प्रति ट्रक लाखों में पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि रेत माफियाओं द्वारा बारिश के मौसम में तगड़ा मुनाफा कमाने के लिए उत्तर प्रदेश को रेत सप्लाई करने की योजना के तहत् अंधाधुंध तरीके से रेत का खनन कर भंडारण कर लिया गया है। अब रेत को उत्तरप्रदेश की ओर भेजना भी शुरू कर दिया गया है। यहां पुल के दोनों ओर रेत खनन का कार्य लगभग दो वर्षों से लगातार जारी है। पुल के आस पास वाली जगह पर रेत खनन से पुल की सुरक्षा पर भी खतरा उतपन्ना हो गया है। बता दें कि यहां से रेत उत्तरप्रदेश तो भेजी जा ही रही है साथ ही अंबिकापुर में भी ले जाकर प्रति ट्रक अठारह से लेकर बीस हजार की दर से बेची जा रही है। रेत खनन और परिवहन के लिए जारी नियमों की अनदेखी हो रही है।खुलेआम एक्सीवेटर और पोकलेन का उपयोग किया जा रहा है।
अस्थाई सड़क बनाने में मुरुम का उपयोग
रेत का परिवहन करने ठेकेदार द्वारा महान नदी के पुल से लगे मुख्य मार्ग से लेकर खनन वाली जगह तक रेत का परिवहन करने हजारों घन मीटर मुरुम का उपयोग कर एक किलोमीटर लंबी अस्थाई सड़क बनाई गई है। सड़क निर्माण में लगी हजारों घन मीटर मुरुम को खनिज विभाग की अनुमति के बगैर नदी के किनारे से ही लगभग एक हेक्टेयर भूमि पर करीब डेढ़ मीटर की गहराई तक गड्ढा खोदकर निकाला गया है। जबकि खनिज विभाग के नियमानुसार निजी या शासकीय भूमि से किसी भी कार्य में उपयोग के लिए मुरुम निकाली जाती है तो प्रति घन मीटर 50 रुपए की दर से सरकारी खजाने में रायल्टी जमा करानी होती है। मगर यहां तो प्रति घन मीटर पचास रुपए के हिसाब से लगभग सात लाख पचास हजार रुपए की करीब पंद्रह हजार घन मीटर मुरुम रायल्टी जमा किए बगैर ही निकाल ली गई। बता दें कि एक हेक्टेयर भूमि की एक मीटर गहराई तक खुदाई करने पर दस हजार घन मीटर मुरुम निकलती है इस हिसाब से डेढ़ मीटर की गहराई तक खुदाई करने में पंद्रह हजार घन मीटर मुरुम निकलेगी।
अब आंदोलन की तैयारी
रेत के इस अवैध कारोबार को लंबे समय से बिना रोक-टोक अंजाम दिया जा रहा है। इसे लेकर आक्रोशित स्थानीय ग्रामीण खनिज विभाग व स्थानीय प्रशासन के ऊपर रेत माफियाओं से कमीशन लेकर रेत खनन की खुली छूट देने का आरोप लगा रहे हैं। इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने कि मांग को लेकर ग्रामीण कई आंदोलन भी कर चुके हैं पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण अब फिर से बड़ा आंदोलन करने की बात कह रहे हैं।यहां अंधाधुंध रेत के खनन के कारण नदी का भू-जल स्तर काफी नीचे चला गया है जिसके कारण इस नदी में दिन रात बहने वाले पानी की जगह पर अब रेगिस्तान नजर आ रहा है। पूरी नदी को जगह-जगह से खोदकर तालाब का शक्ल दे दिया गया है।