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अंबिकापुर के संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में कुलसचिव की कुर्सी पर घमासान, कुलपति बोले-अयोग्य की हुई नियुक्ति

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय अंबिकापुर में कुलपति प्रो राजेंद्र लाकपाले और कुलसचिव शारदा त्रिपाठी के बीच विवाद गहरा गया है। कुलपति ने कुलसचिव की योग्य...और पढ़ें

By Asim Sen GuptaEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sat, 10 Oct 2026 01:53:03 PM (IST)Updated Date: Sat, 10 Oct 2026 02:20:46 PM (IST)
अंबिकापुर के संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में कुलसचिव की कुर्सी पर घमासान, कुलपति बोले-अयोग्य की हुई नियुक्ति
संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय कैंपस। अर्काइव

HighLights

  1. कुलपति ने कुलसचिव की योग्यता पर उठाए सवाल
  2. राजभवन ने नियमित कुलसचिव पदस्थापना के दिए निर्देश
  3. अंदरूनी कलह से विश्वविद्यालय का विकास कार्य रुका

नईदुनिया प्रतिनिधि अंबिकापुर। स्थापना के 18 वर्षों बाद भी बेहतर व्यवस्था के लिए संघर्ष कर रहा संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय अब कुलपति और कुलसचिव के झगड़े में फंस गया है। विश्वविद्यालय के अंदर की यह कलह अब सार्वजनिक हो चुकी है और इसका सीधा असर विश्वविद्यालय के विकास और छात्रों के हित पर पड़ रहा है।

शासन द्वारा कुलसचिव पद के लिए निर्धारित योग्यता के विपरीत नियुक्ति होने और इससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए कुलपति प्रो डाॅ. राजेंद्र लाकपाले ने किसी नियमित कुलसचिव की पदस्थापना का अनुरोध शासन से किया है।

बिना योग्यता के बनाए गए कुलसचिव

कुलपति का कहना है कि उनकी पदस्थापना के बाद उन्होंने अनुभव किया कि कुलसचिव को कार्य का अनुभव नहीं है। जब इसकी जांच कराई गई तो पता चला कि शासन ने कुलसचिव के लिए जो योग्यता निर्धारित की है, उस योग्यता को भी वर्तमान कुलसचिव पूरा नहीं करते हैं, इसके बावजूद उन्हें कुलसचिव बना दिया गया है। इसलिए उन्होंने तमाम वस्तुस्थिति से राज्य सरकार और राजभवन को अवगत कराया है। अब शासन स्तर से ही निर्णय होना है।उनका यह भी कहना है कि वे विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए कुछ ठेकेदारों के साथ मिलकर कुलसचिव उन पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।


राजभवन को दोबारा लिखना पड़ा पत्र

कुलपति के प्रस्ताव पर राजभवन ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र जारी कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं निकल सका है। राज्यपाल के अवर सचिव की ओर से छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को भेजे गए पत्र में डाॅ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी के स्थान पर नियमित कुलसचिव की पदस्थापना का आदेश तत्काल प्रभाव से जारी करने को कहा गया है। पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि इस संबंध में राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशानुसार पुनः अनुरोध किया जा रहा है। राजभवन के पत्र में पुराने पत्र क्रमांक 24 जून 2026 का भी संदर्भ दिया गया है। साथ ही विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से 18 जुलाई 2026 को भेजे गए पत्र का उल्लेख करते हुए संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं।

कुलसचिव बोले - किसी के व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए काम नहीं करूंगा

इधर कुलसचिव डाॅ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी का आरोप है कि शासन ने उन्हें विश्वविद्यालय के हितों के लिए पदस्थ किया है। वह शासन के नियमों और विधानों के अनुरूप कार्य करने के लिए नियुक्त हुए हैं, किसी के व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति के लिए नहीं। किसी का व्यक्तिगत स्वार्थ पूरा नहीं हो रहा है, इसलिए उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद उनकी नियुक्ति हुई है। उन्हें उच्च शिक्षा विभाग में कार्य करने का लंबा अनुभव है। वर्तमान में स्थिति इसलिए ऐसी बनी है कि कुछ लोग व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति करना चाहते हैं। कुलपति का नाम लिए बगैर उनका इशारा कुलपति की ओर है।

18 साल बाद भी हायर सेकेंडरी स्कूल के कमरों में चल रहा शिक्षण विभाग

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी। इस विश्वविद्यालय के बाद प्रदेश में कई विश्वविद्यालय खुले, लेकिन अधोसंरचना विकास के मामले में सभी आगे बढ़ गए, लेकिन संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय अंदरूनी कलह के कारण पिछड़ता चला गया। न तो अकादमिक गतिविधियों में नाम कमा सका और न ही खेलकूद सहित दूसरी गतिविधियों में।कई वर्षों तक उधारी और जुगाड़ की व्यवस्था में विश्वविद्यालय का प्रशासनिक कामकाज संचालित होता रहा। विश्वविद्यालय का शिक्षण विभाग हायर सेकेंडरी स्कूल मणिपुर के अतिरिक्त कक्ष में आज भी संचालित हो रहा है।

भकुरा में स्थानांतरित होना है

विश्वविद्यालय को पिछले सत्र से नए विकसित हो रहे परिसर ग्राम भकुरा में स्थानांतरित जरूर किया गया है, लेकिन वहां भी सुविधाओं का अभाव है।हालत यह है कि अंबिकापुर से विश्वविद्यालय के नए परिसर तक जाने के लिए कोई सुगम सुविधा नहीं है। रामानुजगंज रोड में भकुरा ग्राम से विश्वविद्यालय के लिए जो कच्ची सड़क जाती है, उसका निर्माण भी आज तक नहीं हो सका है। कई भवन अधूरे पड़े हुए हैं, उन भवनों को पूरा नहीं कराया जा सका है।विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधा विस्तार को गति नहीं मिल पा रही है। तमाम अभावों के बीच संचालित हो रहे विश्वविद्यालय को विकसित करने के बजाय कुलपति और कुलसचिव का झगड़ा चल रहा है, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।