
बतौली/सुवारपारा। मौसमी बीमारियों के लिए अति संवेदनशील माने जाने वाले बतौली क्षेत्र में मौतों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। पिछले तीन दिन से बुखार से पीड़ित 12 वर्षीया स्कूली छात्रा की अस्पताल में लाने के तत्काल बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में दावे के विपरीत स्वास्थ्य सुविधा नसीब नहीं हो पाने के कारण लोगों को भारी असुविधाओं का भी सामना करना पड़ रहा है। बुखार से पीड़ित स्कूली छात्रा की मौत से परिवार सदमे में है।
जानकारी के मुताबिक ग्राम सिलसिला निवासी रामनिवास कंवर की पुत्री महालक्ष्मी 12 वर्ष तीन दिन से बुखार से पीड़ित थी। स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता अभियान को ठेंगा दिखाते हुए बीमार महालक्ष्मी के परिजन झाड-फूंक से शुरू में गांव में ही उसका इलाज करा रहे थे लेकिन स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हो रहा था। गांव के ही किसी झोलाछाप डाक्टर से इलाज के नाम पर उसे इंजेक्शन भी लगवाया गया था। इसके बाद भी उसकी तबियत बिगड़ती जा रही थी। बुधवार दोपहर को तबियत ज्यादा खराब हो जाने पर परिजनों ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस की मदद से उसे बतौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दाखिल कराया जहां उपचार शुरू होते ही महालक्ष्मी की मौत हो गई। महालक्ष्मी ने इसी साल पांचवी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। बुखार से उसकी मौत ने परिवारवालों को झगझोड़ दिया है। ऐसे भी बतौली के दूरस्थ इलाके मौसमी बीमारियों के लिए अति संवेदनशील माने जाते हैं। दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव तो है ही जागरूकता के अभाव में ग्रामीण झाड़-फूंक का सहारा भी लेते हैं जिससे स्थिति कईबार बिगड़ जाती है और असमय ही मौत भी हो जाती है। दूरस्थ इलाकों में ग्रामीणों के मौसमी बीमारियों से पीड़ित होने की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।