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अंबिकापुर में ताश के पत्तों की तरह ढह गया अस्थायी पुल: गुणवत्ता की खुली पोल, ग्रामीणों को अब 20 किमी का चक्कर

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भैयाथान अंतर्गत डुमरिया-केवरा मार्ग पर गोबरी नदी पर बना 15 लाख रुपये की लागत का अस्थायी रपटा पहली ही तेज बारिश में बह गया...और पढ़ें

By Asim Sen GuptaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 11:13:06 AM (IST)Updated Date: Mon, 20 Jul 2026 11:13:06 AM (IST)
अंबिकापुर में ताश के पत्तों की तरह ढह गया अस्थायी पुल: गुणवत्ता की खुली पोल, ग्रामीणों को अब 20 किमी का चक्कर
गोबरी नदी पर क्षतिग्रस्त रपटे के ऊपर से बहता पानी

HighLights

  1. एक महीने पहले ही हुई थी 15 लाख से मरम्मत।
  2. गोबरी नदी पर पुल बहने से बड़ा संकट।
  3. एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाएं ठप।

नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर : अंबिकापुर-बैकुंठपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर डुमरिया से केवरा-भैयाथान जाने वाले मार्ग पर गोबरी नदी का रपटा पुल पहली ही तेज बारिश में बह गया। लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग ने करीब 15 लाख रुपये खर्च कर इस अस्थायी रपटे का निर्माण और हाल ही में मरम्मत कराई थी, लेकिन वह ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इसके साथ ही डुमरिया, डबरीपारा, शिवप्रसादनगर, खुटरापारा समेत एक दर्जन से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय सूरजपुर से सीधा संपर्क पूरी तरह टूट गया है।

दरअसल, गोबरी नदी पर बना करोड़ों की लागत का मुख्य पुल पिछले वर्ष जून में आई बाढ़ में ध्वस्त हो गया था। एक साल बीतने के बाद भी नए पुल की स्वीकृति नहीं मिल सकी। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देश पर ग्रामीणों की परेशानी दूर करने के लिए सेतु विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत 15 लाख की लागत से अस्थायी रपटा बनाया था। एक माह पहले ही इसकी मरम्मत भी कराई गई, लेकिन पहली बारिश में ही रपटा बह गया। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


रपटा बहने से डुमरिया, डबरीपारा, शिवप्रसादनगर, खुटरापारा समेत आसपास के दर्जनभर गांवों के हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और रोजी-रोजगार के लिए जिला मुख्यालय आने-जाने वाले ग्रामीणों को अब 20 किलोमीटर से अधिक का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। बरसात में कच्चे-कीचड़ भरे वैकल्पिक रास्तों से आवागमन जोखिमभरा हो गया है। एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाएं भी गांवों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

गुणवत्ता पर उठे सवाल, ग्रामीणों में नाराजगी

ग्रामीणों का आरोप है कि रपटे के निर्माण और मरम्मत में गुणवत्ता के मानकों की खुली अनदेखी की गई। एक माह पहले 15 लाख रुपये खर्च कर मरम्मत कराने के बावजूद पहली ही बारिश में पुल का बह जाना विभाग की लापरवाही उजागर करता है। क्षेत्रवासियों में घटना को लेकर नाराजगी है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही गोबरी नदी पर स्थायी पुल निर्माण की तत्काल स्वीकृति देकर कार्य शुरू कराने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नया पुल नहीं बनता, तब तक मजबूत वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि बारिश में गांवों का संपर्क न टूटे।