अंबिकापुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। वनों के संरक्षण, संवर्धन, प्रबंधन के लिए लगभग एक दशक से उठ रही मांग का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। प्रदेश सरकार ने वषोर् पुरानी इस मांग को विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासियों को सौगात स्वरूप सौंपा है। विधायक लुंड्रा डॉ.प्रीतम राम की मौजूदगी में कलेक्टर संजीव कुमार झा ने रविवार को सरगुजा जिले के 10 ग्रामों की ग्रामसभा को इसका अधिकार पत्र सौंप दिया।

चौपाल ग्रामीण विकास प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान द्वारा वनों के संरक्षण, संवर्धन का अधिकार ग्रामसभा को सौंपे जाने की मांग की जा रही थी। इसके लिए जिला, राज्य स्तर पर आवाज उठाने के साथ धरना, सभा जैसे आयोजन किए गए। अंबिकापुर में चौपाल द्वारा तय अनिश्चितकालीन आंदोलन की रूपरेखा के बाद बतौली, लखनपुर, उदयपुर ब्लाक के ग्रामीणों ने वन अधिकार के लिए शुरू किए गए संघर्ष में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। वर्ष 2012 में शुरू आंदोलन के बाद वर्ष 2013 में 38 गांव के लोगों को सामुदायिक वन अधिकार तो मिला, लेकिन ग्रामसभा को वन प्रबंधन के अधिकार से वंचित रहना पड़ा। सामुदायिक वन प्रबंधन का अधिकार मिलने के बाद भी यह लड़ाई जारी रही और 23 अगस्त 2018 को चौपाल के सहयोग से छत्तीसगढ़ वन अधिकार मंच के बैनर तले ग्रामसभा को सामुदायिक वन प्रबंधन का अधिकार सौंपने 23 अगस्त 2018 से अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारंभ हुई, जिसमें काफी तादाद में ग्रामीण शामिल हुए। 12वें दिन तीन सितंबर 2018 को प्रशासनिक हस्तक्षेप की स्थिति बन गई और बरसते पानी में वनाधिकार के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीणों के पंडाल को प्रशासन ने खाली कराया। इसके बाद भी चौपाल ने संघर्ष जारी रखा। सत्ता परिवर्तन के साथ चौपाल के गंगाराम पैकरा ने वनाधिकार के चल रहे लंबे संघर्ष और ग्रामीणों के हक की लड़ाई के लिए चल रहे प्रयास से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, द्वय केबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव व अमरजीत भगत को अवगत कराया। आदिवासियों के हित में उठी इस मांग को विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर सौगात स्वरूप प्रदेश सरकार द्वारा आदिवासी ग्रामीणों के हित में ग्रामसभा को सौंपने से ग्रामीणों में हर्ष है। इस मौके पर जिला पंचायत सीईओ कुलदीप शर्मा, वनमंडलाधिकारी पंकज कमल, एसी आजाक नागवंशी, चौपाल के गंगाराम पैकरा, ग्राम पंचायत बुले के सरपंच सोमारू राम, उदयपुर विकासखंड के बनकेसमा के बैगा बिहारीलाल, बतौली करदना के भूतपूर्व सरपंच राजनाथ तिर्की, लखनपुर लोसंगा के हृदयराम पटेल, सरपंच पति हरिलाल लकड़ा, सचिव रामसाय पंडो, कृष्णानाथ सरपंच, जीवन तिग्गा, सकरिया के सरपंच नोहर साय, बैगा फतेराम, जगतराम, रेम्हला के मदन राम, बेसाहू राम, सरपंच पति दिनेश तिर्की, तिरकेला के अमृत मझवार, रामगोपाल साहू सचिव, करई के रामलाल, पीयूष लकड़ा, बोधन राम पैकरा सहित अन्य उपस्थित थे।

वनों के संरक्षण, संवर्धन का अधिकार इन ग्रामों को

सरगुजा जिले की जिन ग्रामों को वनों के संरक्षण, संवर्धन, प्रबंधन का अधिकार सरकार ने दिया है, उनमें बतौली विकासखंड का ग्राम करदना, लखनपुर विकासखंड का रेम्हला, लोसगा, सकरिया, सेलरा, तिरकेला, जामा, करई, उदयपुर विकासखंड का बनकेसमा व बुले शामिल है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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