
रवि भूतड़ा, नईदुनिया बालोद। मध्य प्रदेश में सरकारी खरीदी में अनियमितताओं पर कार्रवाई की खबरों के बीच छत्तीसगढ़ बालोद नगर पालिका में जेम पोर्टल के जरिए हुई खरीदी पर सवाल उठे हैं। बालोद नगर पालिका में जेम पोर्टल के माध्यम से हुई सरकारी खरीदी को लेकर शिकायत और दस्तावेजी साक्ष्य सामने आने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि 4,500 रुपये का फिल्टर 40 हजार में खरीदा गया है।
शिकायत में खरीदी प्रक्रिया में अनियमितताओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए जांच की मांग की गई है। ऐसे में सवाल है कि शिकायत में प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कर तथ्यों की पुष्टि कब की जाएगी और अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई कब होगी?
सत्ता पक्ष के पार्षदों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल के लिए निर्धारित क्षमता वाले मेडिकल आरओ प्लांट के नाम पर घरेलू वॉटर फिल्टर की सप्लाई की गई, जबकि सोलर पावर्ड वॉटर कूलर के नाम पर कम क्षमता वाला सामान्य कूलर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि दोनों सामग्रियों के बिल महज 48 घंटे के भीतर पास कर दिए गए। मामले में पार्षदों ने दस्तावेजों और छायाचित्रों के साथ कलेक्टर से शिकायत कर जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, अस्पताल के लिए 125 लीटर प्रति घंटे (एलपीएच) क्षमता वाले पोर्टेबल हेमोडायलिसिस आरओ प्लांट की खरीदी 40 हजार रुपये प्रति नग की दर से की गई। आरोप है कि इसके स्थान पर 10 लीटर क्षमता वाला ब्राइट एक्वा कंपनी का घरेलू वॉटर फिल्टर सप्लाई किया गया, जिसकी बाजार कीमत शिकायतकर्ताओं ने 4,500 से 6,000 रुपये के बीच बताई है। इस खरीदी में करीब 2.40 लाख रुपये की कथित अनियमितता का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने सामग्री की वास्तविक क्षमता, गुणवत्ता और खरीदी दर की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
दूसरा मामला सोलर पावर्ड वॉटर कूलर की खरीदी से जुड़ा है। शिकायत में बताया गया है कि अनुबंध 150 एलपीएच क्षमता वाले सोलर पावर्ड कूलर का था, जिसके लिए 80 हजार रुपये प्रति नग की दर निर्धारित की गई थी। इसके विपरीत, 60 एलपीएच क्षमता वाला सामान्य बिजली से चलने वाला कूलर सप्लाई किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, कूलर के बॉक्स पर 49,800 रुपये अधिकतम खुदरा मूल्य अंकित था, जबकि भुगतान 80 हजार रुपये प्रति नग की दर से किया गया। इस मामले में 4.80 लाख रुपये की कथित अनियमितता का दावा किया गया है।
शिकायत में खरीदी की समय-सीमा पर भी सवाल उठाए गए हैं। दस्तावेजों के अनुसार, 27 मई 2025 को जेम पोर्टल पर संविदा आदेश जारी हुआ। 28 मई को सप्लायर फर्म मेसर्स आयरा एंटरप्राइजेज ने इनवॉइस जारी किया और 29 मई को बिल पास कर दिए गए। पार्षदों का आरोप है कि सामग्री की तकनीकी जांच, भौतिक सत्यापन और इंस्टॉलेशन रिपोर्ट के बिना भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। उन्होंने स्टॉक पंजी के पेज क्रमांक 64 पर दोनों सामग्रियों की प्रविष्टियों का हवाला देते हुए संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
नगर पालिका के सभापति गोकुल ठाकुर, पार्षद दीपक लोढ़ा और एल्डरमैन नितेश वर्मा ने प्रमाणित छायाचित्रों और बिलों के साथ कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को शिकायत सौंपी है। शिकायत की प्रतियां प्रमुख सचिव, संभागीय आयुक्त, नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) को भी भेजे जाने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ताओं ने प्राथमिकी दर्ज करने, संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट करने, अनियमितता की राशि वसूलने और पिछले तीन वर्षों में जिले के विभिन्न विभागों में फर्म द्वारा की गई सप्लाई की विशेष जांच कराने की मांग की है।
पार्षदों का कहना है कि मामले की जांच केवल दो बिलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पिछले तीन वर्षों में संबंधित फर्म द्वारा जिले के विभिन्न सरकारी विभागों में की गई सप्लाई, टेंडर प्रक्रिया, उत्पादों की गुणवत्ता और भुगतान संबंधी दस्तावेजों का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि यदि निर्धारित क्षमता और तकनीकी मानकों के अनुरूप सामग्री की आपूर्ति नहीं हुई है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।
मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या खरीदी के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों और सत्यापन प्रक्रिया का पालन किया गया था.? बिलों को मंजूरी देने से पहले सामग्री की गुणवत्ता और वास्तविक क्षमता की जांच किसने की.? शिकायतकर्ताओं ने आरोपों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई है। अब जिला प्रशासन और नगरीय प्रशासन विभाग की जांच तथा आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आरोपों की वास्तविकता तकनीकी जांच, खरीदी के रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।