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लोकल ट्रेनें रद, बसें पैक, तीजा पर छत्तीसगढ़ में महिला यात्रियों को हुई समस्या, रेलवे पर अनदेखी का आरोप

संगठनों ने रेल महाप्रबंधक से मांग की है कि 13 और 14 सितंबर को बंद की गई लोकल ट्रेनों का परिचालन तत्काल पूर्ववत किया जाए। इसके साथ ही 15, 16 और 17 सितं...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 10:11:47 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 10:14:13 PM (IST)
लोकल ट्रेनें रद, बसें पैक, तीजा पर छत्तीसगढ़ में महिला यात्रियों को हुई समस्या, रेलवे पर अनदेखी का आरोप
बालोद में बस यात्रियों की भीड़। नईदुनिया

HighLights

  1. तीजा पर्व पर लोकल ट्रेनें बंद होने पर आक्रोश
  2. रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन कर सौंपा गया ज्ञापन
  3. त्योहार पर अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग

नईदुनिया प्रतिनिधि, भाटापारा। छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्व तीजा-पोरा के दौरान 12 लोकल यात्री ट्रेनों का परिचालन बंद किए जाने के रेलवे के निर्णय को लेकर भाटापारा में आक्रोश भड़क उठा है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्टेशन परिसर में जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद रेल महाप्रबंधक के नाम भाटापारा स्टेशन प्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर लोकल ट्रेनों का परिचालन तत्काल बहाल करने की मांग की गई। रायपुर में भी संगठन के पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपा।

संगठनों ने रेलवे प्रशासन के निर्णय को छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और यहां के लाखों यात्रियों की जरूरतों की अनदेखी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि तीजा छत्तीसगढ़ की माताओं और बहनों के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं अपने बच्चों के साथ ससुराल से मायके और पर्व मनाने के बाद वापस ससुराल लौटती हैं। ऐसे में लोकल ट्रेनें बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को होगी।


छोटे स्टेशनों के यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी

ज्ञापन में कहा गया कि कोरबा-रायपुर-दुर्ग रेलखंड पर चलने वाली लोकल ट्रेनें छोटे-बड़े स्टेशनों के बीच आवागमन का प्रमुख, सुरक्षित और अपेक्षाकृत कम खर्च वाला साधन हैं। तीजा के समय इन ट्रेनों में यात्रियों की संख्या स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। ऐसे समय नियमित लोकल ट्रेनों का संचालन रोकने से यात्रियों को महंगे निजी वाहनों और बसों का सहारा लेना पड़ेगा।

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भाटापारा रेल अधिकारी को ज्ञापन सौंपते संगठन के प्रतिनिधि। - नईदुनिया

बढ़ेंगी दुर्घटनाओं की आशंका

संगठनों ने आशंका जताई कि इससे सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ेगा और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है। उनका कहना है कि रेलवे को यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए ट्रेनें बढ़ानी चाहिए थीं, न कि नियमित लोकल ट्रेनों को ही बंद करना चाहिए था।

दूसरे राज्यों के पर्व पर अतिरिक्त ट्रेनें

प्रदर्शनकारियों ने रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि छठ पर्व के दौरान बिहार और दुर्गा पूजा के समय पश्चिम बंगाल की ओर यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों तथा अतिरिक्त कोच की व्यवस्था की जाती है। इसके विपरीत छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्व तीजा के दौरान नियमित लोकल ट्रेनों का परिचालन बंद करना समझ से परे है।

15 से 17 सितंबर तक तीजा स्पेशल ट्रेन की मांग

संगठनों ने रेल महाप्रबंधक से मांग की है कि 13 और 14 सितंबर को बंद की गई लोकल ट्रेनों का परिचालन तत्काल पूर्ववत किया जाए। इसके साथ ही 15, 16 और 17 सितंबर को यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त तीजा स्पेशल लोकल ट्रेनें चलाई जाएं। ज्ञापन में दिन के समय चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों की आरक्षित बोगियों में भी राजनांदगांव से कोरबा और रायगढ़ तक साधारण यात्री टिकट पर यात्रा की अनुमति देने की मांग की गई है, ताकि पर्व के दौरान यात्रियों को राहत मिल सके।

बसों में भीड़-भाड़

इधर, बालोद में हरितालिका तीज पर्व को लेकर महिलाओं में उत्साह चरम पर है। रविवार को करूभात खाने के बाद महिलाओं ने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए 24 घंटे का निर्जला व्रत रखा। तीज पर्व मनाने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं ससुराल से मायके लौट रही हैं। इसका असर यात्री परिवहन व्यवस्था पर साफ दिखाई दिया।

खड़े खड़े करना पड़ा सफर

रविवार को बालोद के नए बस स्टैंड में यात्रियों की भारी भीड़ रही और बसें क्षमता से अधिक सवारियों से खचाखच भरी नजर आईं। नए बस स्टैंड से धमतरी, राजनांदगांव, दुर्ग, दल्लीराजहरा और भानुप्रतापपुर की ओर जाने वाली बसों में सीटें तो पहले ही भर गईं, इसके बाद यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। कई बसों में हालात इतने खराब रहे कि यात्री दरवाजे के पास खड़े होने के साथ गेट पर लटककर भी सफर करते नजर आए।

आंखे मूंदे रहा परिवहन विभाग

इसके बावजूद इस बार भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए परिवहन विभाग की ओर से कोई विशेष अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था नजर नहीं आई। क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर चलने वाली बसों पर भी कार्रवाई का अभाव दिखाई दिया। वहीं यातायात विभाग की ओर से भी ओवरलोडिंग और बसों के गेट पर लटककर सफर करने वाले यात्रियों को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई।