नवापारा-राजिम। गंगा दशहरा पर्व के अवसर पर नगर के सकल समाज के लोगों व जनप्रतिनिधियों ने त्रिवेणी महारानी महानदी की आरती उतारकर पूजा अर्चना की।
इस अवसर पर उपस्थित नगरपालिका अध्यक्ष धनराज मध्यानी ने कहा कि महानदी हमारे अंचल की जीवन रेखा है, वह हमारी प्यास बुझाती है, खेतों को सींचती है हम सबका सौभाग्य है कि हम इसके तट पर बसे हैं उनके प्रति कृतज्ञ भाव से पंडित परिषद की ओर से आरती बरसों से होती रही है। माघी पुन्नाी मेले में तो विशेष रूप से समारोह पूर्वक यह धार्मिक आयोजन होता है, हम सब जनप्रतिनिधियों का यह प्रयास होगा कि महानदी के किनारे घाट तो लगभग बन चुके हैं उसका और विस्तार व सुदंरीकरण किया जाए व घाट पर ही गंगा मैया का एक भव्य और दिव्य मंदिर बनाया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ के इस प्रयागराज में दूर-दूर से आने वाले श्रद्घालुओं को भी इसका लाभ मिल सके।
त्रिवेणी आरती के रचयिता व संयोजक पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि विगत 20 वर्षों से महानदी महतारी
की आरती में देश के कोने कोने से आए साधु-संतों ने शामिल होकर अपनी प्रसन्नाता व्यक्त की है, रमेशभाई ओझा 'भाईश्री', सतपाल महाराज, द्वारकेश लालजी, युधिष्ठिर लालजी, बालकदास, महंत रामसुंदर दास, गोवर्धन शरणजी, ब्रह्मलीन संतकवि पवनदीवान व कृष्णा रंजनजी त्रिवेणी आरती में शामिल हुए हैं और अपना आशीर्वाद दिया है।
पुराणों में महानदी का
चित्रोत्पला नाम से वर्णन
शास्त्री ने बताया कि गंगा दशहरा को गंगा पूजन से दस तरह के पाप, तीन कायिक, चार वाचिक व तीन मानसिक, इन पापों का विमोचन होता है। गंगा के तो दर्शन मात्र से ही मुक्ति मिल जाती है, हमारी महानदी महतारी साक्षात गंगा है, जिसे पुराणों ने चित्रोत्पला कहकर पुकारा है, इसीलिए हमारे कुलेश्वर महादेव का मूल नाम चित्रोत्पलेश्वर है, बड़ी प्रसन्नाता की बात है कि आने वाले दिनों में यहां गंगा मैया का मंदिर भी बन जाएगा और साधु संतों व भक्त जनों की बरसों की मांग पूरी हो जाएगी। महाआरती में अजय कोचर, सुनील बंगानी, श्रीकृष्ण सारडा, आनंद छल्लानी, सुमित पारख, अमित माखीजा, आशीष गंगवाल सहित अनेक लोग शामिल हुए।