गुरुर(नईदुनिया न्यूज)। लाकडाउन हटने के बाद से नगरीय निकाय क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गृह निर्माण का कार्य जोरों से चल रहा है, जहां नगरीय निकाय के अधिकारियों की अनदेखी के कारण हितग्राहियों द्वारा फ्लाई एस ब्रिक्स ईंटों के बजाय लाल ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है। शासकीय कार्यो में एक तरफ लाल ईट का उपयोग पर प्रतिबंध लगाने अधिकारी गंभीर नहीं है, तो दूसरी तरफ राजस्व विभाग भी क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित लाल ईंट के भठ्ठों पर कार्यवाही करने मे कोताही बरत रहे है। परिणाम स्वरूप अब नगरीय निकाय क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना में भी धड़ल्ले से लाल ईंट का उपयोग किया जा रहा है।
नगर पंचायत गुरुर से जानकारी के मुताबिक 2021-22 में गुरुर नगर के विभिन्न वार्डों में कुल 130 भवन स्वीकृत है, जिसमें लगभग 40 भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। नगर के वार्ड 12, 13 सहित अन्य वार्डो में भी बनाए जा रहे भवन निर्माण में खुलेआम लाल ईंट का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है जबकि नियमतः शासकीय योजनाओं में फ्लाई एस ब्रिक्स ईंटों का ही प्रयोग किया जाना है। जनपद प्रशासन से जानकारी के मुताबिक शासन द्वारा समस्त शासकीय योजनाओं से होने वाले कार्य का निर्माण फ्लाई एस ब्रिक्स ईंटों से ही करना है, लेकिन क्षेत्र में जगह-जगह लाल ईंट का भट्ठा संचालित है, जिसके कारण हितग्राही फ्लाई एस ब्रिक्स ईंट के बजाय लाल ईंट का उपयोग कर रहे हैं।
गांव-गांव में संचालित प्रतिबंधित लाल ईंट का भट्ठा
गुरूर ब्लाक के ग्राम बोहारडीह, ठेकवाडीह, भरदा, भेजामैदानी, कपरमेटा, कुलिया सहित अन्य गावों में लोग प्रशासन की नियमों की धज्जियां उड़ाकर अवैध तरीके से लाल ईंट निर्माण कर रहे हैं। लगातार शिकायत के बाद भी इस दिशा में स्थानीय प्रशासन व्दारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वर्तमान में गुरूर ब्लाक से गुजरी खारून नदी देरानी-जेठानी नाला के किनारे ईंट भट्टे स्थापित किए गए हैं। ईंट भट्टा के संचालक नदी के किनारे मिट्टी खोदकर ईंटों का निर्माण कर रहे हैं। इसके कारण नदियों का कटाव तेजी से बढ़ रहा है। नदियों का कटाव बढ़ने से पर्यावरण को खतरा बढ़ने के साथ ही नदियों का स्वरूप बिगड़ने से आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
फ्लाई ऐश ईंट से लाभ के बाद भी निर्माण नहीं
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन के आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय ने सभी नगरीय निकायों समेत निर्माण एजेंसियों को मिट्टी से बनी ईंट का उपयोग बंद करने के निर्देश दिए हैं, क्योकि फ्लाई ऐश ईंटों के उपयोग से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ पर्यावरण का संरक्षण होता है, इसके बाद भी नगरीय निकाय क्षेत्र में इस तरह लापरवाही का खेल चल रहा है। बता दें कि पारंपरिक मिट्टी के ईंटों की तुलना में फ्लाई ऐश ईंटें बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष लाभ प्रदान करती हैं, क्योकि यह ईंट सही आकार, बराबर कोने के होते है, इसीलिए इससे फिनिशिंग दीवार के दोनों तरफ आती है, जिससे प्लास्टर में भी सीमेंट की बचत होती है।
जागरूक किया जाएगाः कुम्हार
उप अभियंता एचएस कुम्हार ने बताया कि फ्लाई ऐश ईंट का उपयोग के लिए हम किसी हितग्र्राही को बाध्य नहीं कर सकते। शासन के नियमानुसार फ्लाई ऐश ईंट का उपयोग के लिए नगरवासियों व निर्माणकर्ता को जागरूक किया जाएगा।
फ्लाई एस ब्रिक्स का उपयोग होना हैः पांडे
मामले में नगरी निकाय क्षेत्र के प्रधानमंत्री आवास योजना के उप अभियंता शुभम पांडे ने कहा कि इस निर्माण कार्य में फ्लाई एस ब्रिक्स का उपयोग होना है।
स्वेच्छानुसार कर सकते हैं उपयोग
सीएमओ श्रीनिवास पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भवन निर्माण के लिए हितग्राही अपनी स्वेच्छानुसार ईंट का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन अन्य की अपेक्षा फ्लाई ऐश ईंट द्वारा निर्मित भवन मजबूती रहता है।