
रवि भूतड़ा, नईदुनिया, बालोद। अच्छी नौकरी और बेहतर कमाई का सपना दिखाकर दो मजदूरों को दूसरे राज्य ले जाने, बंधक बनाकर जबरन काम कराने और रिहाई के बदले पैसे मांगने का मामला सामने आया है। मामले में मानव तस्करी की आशंका जताई जा रही है।
जिले के बालोद थाना क्षेत्रान्तर्गत्त ग्राम करहीभदर निवासी संपत लाल चतुर्वेदी पिता दयालु राम चतुर्वेदी (45) और राकेश कुमार खत्री पिता आनंद खत्री (34) को नागपुर की बिस्किट फैक्ट्री में काम दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन आरोप है कि उन्हें नागपुर से तमिलनाडु पहुंचा दिया गया। वहां दोनों को बंधक बनाकर काम कराने और घर लौटने नहीं देने की बात सामने आई है।
परिजनों का आरोप है कि मजदूरों को छोड़ने के बदले रकम मांगी गई, जिसके बाद उन्होंने दो बार में कुल 16 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए। इसके बावजूद दोनों मजदूरों की रिहाई नहीं हुई। परेशान परिजनों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर दोनों की सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामला बालोद थाना क्षेत्र के ग्राम करहीभदर का है। यहां के संपत चतुर्वेदी और राकेश खत्री 28 सितंबर को रोजगार की तलाश में घर से निकले थे। आरोप है कि गुरुर थाना क्षेत्र के ग्राम नंगझर निवासी चंद्रेश ठाकुर ने दोनों को नागपुर की एक बिस्किट फैक्ट्री में काम दिलाने का भरोसा दिया था। चंद्रेश का संपत के घर आना-जाना था, इसलिए परिवार ने भी उस पर विश्वास किया।
संपत की पत्नी कौशल्या चतुर्वेदी ने नईदुनिया को फोन पर बताया कि उनके पति अपने खर्च से ट्रेन का टिकट बनवाकर नागपुर गए थे। वहां पहुंचने के बाद उन्होंने फोन कर इसकी जानकारी भी दी थी। लेकिन उसी रात उन्हें तमिलनाडु ले जाया गया। वे नागपुर से तमिलनाडु कैसे पहुंचे और वहां किस जगह पर हैं, इसकी जानकारी परिवार को नहीं है। नौकरी के लिए घर से निकले दोनों मजदूरों का अब तक वापस नहीं लौटना परिजनों की चिंता बढ़ा रहा है।
कौशल्या चतुर्वेदी के मुताबिक, पति से फोन पर बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि उन्हें कहीं भी आने-जाने नहीं दिया जा रहा है। उन पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है और डांट-डपटकर जबरदस्ती काम कराया जा रहा है। 2 अक्टूबर को थाने में शिकायत के पहले से बंधक बनाकर रखा गया है। परिजनों का आरोप है कि दोनों मजदूरों से बोरवेल से संबंधित काम कराने के साथ गाय-बकरियां चराने का काम भी लिया जा रहा है। कौशल्या ने बताया कि चंद्रेश ठाकुर को उनके घर आए पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन उनके पति वापस नहीं लौटे हैं।
परिजनों के अनुसार, फोन पर धमकी दी गई कि पैसे नहीं भेजने पर मजदूरों को नहीं छोड़ा जाएगा। इसके बाद रविवार रात 8 बजकर 2 मिनट पर आठ हजार रुपये और रात 8 बजकर 8 मिनट पर फिर आठ हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से लोकेश नामक व्यक्ति को ट्रांसफर किए गए। इस तरह महज छह मिनट के अंतराल में कुल 16 हजार रुपये भेजे गए। परिजनों का कहना है कि रकम भेजने के बाद भी दोनों मजदूरों को नहीं छोड़ा गया और उन्हें दोबारा धमकियां दी जा रही हैं।
अपने पतियों की सलामती को लेकर चिंतित राकेश खत्री की पत्नी पद्मा बाई और संपत चतुर्वेदी की पत्नी कौशल्या चतुर्वेदी ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और बालोद कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पत्नियों की माने तो उन्होने बालोद थाने में 2 अक्टूबर को और एसपी के पास 5 अक्टूबर को लिखित शिकायत दिए है। परिजनों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर दोनों मजदूरों को तमिलनाडु से सुरक्षित वापस लाने की मांग की है।
कर रहे हैं मामले की जांच
28 सितम्बर को गुरुर थाना क्षेत्रान्तर्गत नंगझर निवासी चन्द्रेश ठाकुर द्वारा ग्राम करहीभदर निवासी सम्पत चतुर्वेदी और राकेश खत्री को काम दिलाने के बहाने तमिलनाडु ले जाया गया है, उक्त व्यक्तियों के परिजनों ने शिकायत दी है, की संपत और राकेश से बोर मशीन गाड़ी में जबरदस्ती काम करवाया जा रहा है, घर वापस आने नही दिया जा रहा है। घर वालो के अनुसार रिहाई के लिए पैसों की भी डिमांड की गई है, जिसकी तफ्तीश की जा रही है।
-चन्द्रकांत गवर्ना, एएसपी, बालोद