छत्तीसगढ़ का यूट्यूबर साथियों सहित पहुंचा जेल, शिक्षक को ब्लैकमेल कर मांग रहा था 10 हजार
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में शासकीय प्राथमिक शाला पुटसु के प्रभारी प्रधान पाठक को निलंबन की धमकी देकर 10 हजार रुपये की अवैध वसूली करने वाले यूट्यूबर...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 01:53:50 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 01:53:49 PM (IST)
पुलिस की गिरफ्त मे आरोपी। - पुलिसHighLights
- शिक्षक से अवैध वसूली करने वाला यूट्यूबर गिरफ्तार
- हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने पर सरेंडर
- वीडियो बनाकर बदनाम करने वाले पहुंचे अब जेल
नईदुनिया प्रतिनिधि, बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्कूल परिसर के भीतर घुसकर शिक्षक को ब्लैकमेल करने और सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार कर अवैध उगाही करने वाले एक यूट्यूबर की चाल आखिरकार उल्टी पड़ गई। शासकीय प्राथमिक शाला के प्रभारी प्रधान पाठक को नौकरी से निलंबित कराने और बदनाम करने की धमकी देकर 10 हजार रुपये मांगने वाले यूट्यूबर और उसके दो साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
बिलासपुर हाईकोर्ट द्वारा मुख्य आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने और पुलिस की लगातार दबिश के बाद तीनों आरोपियों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल करा दिया गया।
स्कूल में घुसकर बनाया वीडियो, निलंबन कराने की दी धमकी
यह पूरा मामला बलरामपुर जिले के थाना पस्ता अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला पुटसु का है। विद्यालय के प्रभारी प्रधान पाठक रुकमण बारीक ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि टांगरमहरी निवासी यूट्यूबर दीपक यादव (23 वर्ष) उनसे 10 हजार रुपये की अवैध मांग कर रहा था। शिक्षक द्वारा पैसे देने से साफ इनकार करने पर 25 अगस्त 2026 की दोपहर दीपक के दो साथी श्रवण यादव (34 वर्ष, निवासी पुटसू पस्ता) और सूर्या यादव (20 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक चार, बलरामपुर) जबरन स्कूल में घुस आए।
बिना अनुमति के बनाया वीडियो
दोनों ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के परिसर का वीडियो बनाना शुरू कर दिया और शिक्षक के साथ अशोभनीय व्यवहार किया। आरोपियों ने धमकाया कि यदि उन्होंने तत्काल रकम नहीं दी, तो वीडियो को यूट्यूब व फेसबुक पर डालकर पूरे समाज में बदनाम कर देंगे और सीधे विभाग से सस्पेंड करा देंगे।
पैसे नहीं मिले तो सोशल मीडिया पर किया दुष्प्रचार
प्रधान पाठक के अडिग रहने और पैसे देने से मना करने पर आरोपियों ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से संपादित वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दिया। इस भ्रामक और अनधिकृत वीडियो के कारण विद्यालय की प्रतिष्ठा और शिक्षक की व्यक्तिगत व सामाजिक साख को गहरा आघात पहुंचा। शिक्षक की शिकायत पर पस्ता थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 221, 351(2), 308(2), 356(3) और 3(5) के तहत गंभीर गैर-जमानती अपराध दर्ज किया। प्रकरण दर्ज होते ही तीनों आरोपी फरार हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान बने गिरफ्तारी का आधार
फरार आरोपियों की तलाश के साथ पुलिस ने मामले में पुख्ता साक्ष्य जुटाए। जांच अधिकारी ने घटनास्थल का मुआयना कर प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों व स्कूली कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के स्क्रीनशॉट और फुटेज को पेन ड्राइव में साक्ष्य के रूप में जब्त किया गया।
अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज
इस बीच मुख्य आरोपी दीपक यादव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट बिलासपुर में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी, जिसे अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निरस्त कर दिया। चारों तरफ से दबाव बढ़ने के बाद 14 अक्टूबर 2026 को तीनों आरोपियों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया, जहां से पुलिस ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर जेल भेजा।
सोशल मीडिया यूजर्स के लिए जरूरी सलाह
बलरामपुर पुलिस प्रशासन ने नागरिकों और सोशल मीडिया क्रिएटरों से अपील की है कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग जिम्मेदारी से करें। किसी भी व्यक्ति या संस्था की छवि को धूमिल करने वाली सामग्री बिना तथ्यात्मक पुष्टि के प्रसारित करना कानूनी अपराध है। यदि कोई तथाकथित यूट्यूबर या फर्जी पत्रकार वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसों की मांग करता है, तो डरे बिना तत्काल नजदीकी पुलिस थाने या आपातकालीन हेल्पलाइन 112 पर शिकायत दर्ज कराएं।