अजब-गजब छत्तीसगढ़: देवताओं की थाने में हाजिरी, पुलिस ने किया स्वागत, कल होगी सुनवाई, फिर होगा सजा का ऐलान
छत्तीसगढ़ के केशकाल में भंगाराम जात्रा की अनूठी परंपरा के तहत देवी देवताओं के प्रतीक स्वरूप थाने पहुंचे और हाजिरी दी। पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धापूर्व...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 12 Sep 2026 05:42:02 PM (IST)Updated Date: Sat, 12 Sep 2026 05:43:41 PM (IST)
बस्तर के केशकाल में पहुंची जात्रा का स्वागत करते पुलिसकर्मी। नईदुनियाHighLights
- भंगाराम जात्रा में निभाई गई अनूठी परंपरा
- थाने पहुंचकर देवी देवताओं ने दी हाजिरी
- पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धापूर्वक किया स्वागत
चिराग उपाध्याय, नईदुनिया, केशकाल। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आस्था और लोकपरंपरा का एक ऐसा अनूठा रंग देखने को मिला, जहां देवी-देवताओं के प्रतीक थाने पहुंचे और पुलिस के सामने हाजिरी दी। मौका था केशकाल की प्रसिद्ध भंगाराम जात्रा का। शनिवार को जात्रा की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक उत्साह के बीच हुई।
भंगाराम जात्रा के दौरान क्षेत्र के अलग-अलग देवी-देवताओं के प्रतीक स्वरूपों को लेकर ग्रामीण और श्रद्धालु केशकाल थाना परिसर पहुंचे। यहां पुलिस विभाग की ओर से उनका श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया। अनुविभागीय अधिकारी पुलिस अरुण नेताम, नगर निरीक्षक विकास बघेल समेत पुलिस स्टाफ ने परंपरा के अनुरूप देवी-देवताओं का सम्मान और अभिनंदन किया।
हाजिरी दर्ज कराई
थाना परिसर में इस दौरान धार्मिक आस्था और उत्साह का माहौल नजर आया। पुलिस अधिकारियों और जवानों ने श्रद्धालुओं के साथ परंपरा में सहभागिता निभाई। इसके बाद मान्यता के अनुसार देवी-देवताओं ने थाना परिसर में अपनी हाजिरी दर्ज कराई।
यहां लगती है देवताओं की अदालत
भंगाराम जात्रा की सबसे खास पहचान इसकी देवताओं की अदालत की परंपरा है। इस आयोजन में देवी-देवताओं से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार पेशी और हाजिरी की रस्म निभाई जाती है। स्थानीय आस्था के अनुसार देवताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसी अनूठी परंपरा को देखने के लिए केशकाल और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंचते हैं। जात्रा शुरू होते ही पूरा क्षेत्र धार्मिक रंग में रंग गया। देवी-देवताओं के प्रतीक स्वरूपों के साथ पहुंचे ग्रामीणों के कारण वातावरण भक्तिमय नजर आया।
सुनवाई के बाद होता है सजा का ऐलान
भंगाराम जात्रा में देवताओं की अदालत की रस्म को लेकर लोगों में खास उत्सुकता रहती है। परंपरा के अनुसार हाजिरी के बाद आगे की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसी वजह से जात्रा का अगला चरण भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सुनवाई के बाद सजा का ऐलान भी किया जाता है।
बस्तर की संस्कृति का जीवंत उदाहरण
भंगाराम जात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी लोकसंस्कृति और सामुदायिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है। आधुनिक दौर में भी ग्रामीण उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस परंपरा को निभा रहे हैं। केशकाल सहित आसपास के गांवों से लोगों की भागीदारी इस आयोजन को और खास बनाती है। देवी-देवताओं की थाना परिसर में हाजिरी और पुलिस द्वारा उनका सम्मान इस जात्रा की विशिष्ट पहचान को सामने लाता है। आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की है।