
विनोद सिंह, नईदुनिया, जगदलपुर। बस्तर संभाग में 23 से 26 सितंबर के बीच हुई अति वर्षा और नदी-नालों में आई भीषण बाढ़ ने शिक्षा व्यवस्था को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। संभाग के बाढ़ प्रभावित सात जिलों के 187 गांवों के 150 सरकारी स्कूलों में कुछ पूर्ण तो कई आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें सर्वाधिक 113 स्कूल किसी की छत टूटी, दीवारों में दरारें हैं तो कई बाढ़ पानी उतरने के बाद कीचड़ से भर गए हैं। इससे शाला संचालन प्रभावित है।
पंचायत भवनाें, सांस्कृतिक रंगमंच, आश्रम-छात्रावासों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामुदायिक भवनों में वैकल्पिक व्यवस्था कर शाला संचालन का प्रयास किया जा रहा है। बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर जिले में ऐसे स्कूल जिनका स्वयं का भवन नहीं है और ग्रामीणों द्वारा बनाई गई झोपड़ियाें में स्कूल चल रहे थे, कुछ जगहों पर झोपड़ियां टूटने से स्कूल बंद होने की स्थिति में आ गए हैं। यहां झोपड़ियाें की मरम्मत कर शाला संचालन करने लायक स्थिति में लाने का प्रयास चल रहा है।
शिक्षा विभाग के प्रारंभिक सर्वेक्षण में बाढ़ प्रभावित स्कूलों में दर्ज लगभग आठ हजार विद्यार्थी इससे प्रभावित हुए हैं। जैसे-जैैसे जिलों से रिपोर्ट आ रही है उसकेे अनुसार विद्यार्थियाें के लिए किताब-कापी, स्कूल ड्रेस आदि अन्य जरूरत की सामग्रियां उपलब्ध कराने का प्रस्ताव जिला प्रशासन और राज्य शासन को भेजा जा रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी बस्तर बीआर बघेल से चर्चा करने पर उनका कहना था कि जिले में प्रभावित 113 स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए 2.70 करोड़ रुपये का प्रस्ताव जिला प्रशासन को दिया गया है। सर्वाधिक नुकसान बकावंड, बस्तर, लोहंडीगुड़ा आैर जगदलपुर ब्लाक की स्कूलों को हुआ है।
संयुक्त संचालक शिक्षा बस्तर संभाग एचआर सोम का कहना है कि बारिश बाढ़ से संभाग में लगभग डेढ़ सौ स्कूलों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। सबसे अधिक नुकसान बस्तर जिले में हुआ है। ऐसे स्कूल भवन जहां शाला संचालन संभव नहीं है वहां वैकल्पिक भवनों की व्यवस्था कर धीरे-धीरे स्कूलों का संचालन शुरू किया जा रहा है। शासन-प्रशासन को भी दैनिक रिपोर्ट भेजी जा रही है।