विश्वकर्मा पूजा पर बैलाडीला की खूबसूरत वादियों और खदानों का रास्ता खुलेगा, दीदार करने पहुंचेंगे सैलानी
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर 17 सितंबर को एनएमडीसी किरंदुल प्रबंधन ने पर्यटकों के लिए बैलाडीला की खूबसूरत पहाड़ियों और लौह अयस्क खदानों के द्वार खोल दिए...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 04:59:18 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 05:00:51 PM (IST)
बैलाडीला की खदानों का रास्ता पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। - एआईHighLights
- एनएमडीसी किरंदुल प्रबंधन द्वारा 17 सितंबर को पर्यटकों के प्रवेश की अनुमति
- कैलाश नगर के भोलेनाथ मंदिर में दर्शन और सरफिरी घाटी के दीदार का अवसर
- पड़ोसी राज्यों से उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को पत्र।
नईदुनिया प्रतिनिधि, किरंदुल। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्थित बैलाडीला की सुरम्य पहाड़ियों और विशाल लौह अयस्क खनन क्षेत्र का दीदार करने के इच्छुक पर्यटकों के लिए सुखद खबर है। विश्वकर्मा पूजा के पावन अवसर पर सैलानियों के आवागमन को लेकर एनएमडीसी किरंदुल प्रबंधन ने कदम उठाया है।
प्रबंधन ने 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के दिन पर्यटकों के लिए खदान क्षेत्र और पर्यटन स्थलों की राह खोलने का आधिकारिक निर्णय लिया है। इस अनुमति के मिलने से खदान क्षेत्र के भ्रमण की पुरानी और लोकप्रिय परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी है।
प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का संगम
विश्वकर्मा पूजा के इस विशेष अवसर पर छत्तीसगढ़ के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी भारी संख्या में सैलानियों के किरंदुल और बैलाडीला पहुंचने की उम्मीद है। इस दौरान पर्यटकों को बादलों से घिरी पहाड़ियों, हरियाली से भरी सरफिरी घाटी की अनूठी प्राकृतिक सुंदरता और विशालकाय खनन मशीनों को नजदीक से देखने का सुनहरा अवसर मिलेगा।
कैलाश नगर भोलेनाथ मंदिर में उमड़ेंगे श्रद्धालु
इसके साथ ही, सैलानी पहाड़ियों के बीच स्थित प्रसिद्ध और भव्य कैलाश नगर भोलेनाथ मंदिर में जाकर दर्शन कर सकेंगे तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर पाएंगे। इस दिन लौह अयस्क खदानों में उपयोग होने वाले भारी-भरकम उपकरणों और मशीनों की भी विशेष पूजा की जाती है, जिसे देखना पर्यटकों के लिए अपने आप में एक अनूठा अनुभव होता है।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के कड़े इंतजाम
पर्यटकों की संभावित भारी भीड़ और सुरक्षा के मद्देनजर एनएमडीसी किरंदुल के उप महाप्रबंधक ने स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया है। प्रबंधन की ओर से किरंदुल एसडीओपी को आधिकारिक पत्र लिखकर कानून-व्यवस्था, सुचारू यातायात और पार्किंग व्यवस्था बनाए रखने का अनुरोध किया गया है। चूंकि खदान क्षेत्र संवेदनशील और पहाड़ी इलाका है, इसलिए प्रशासन के सामने सुरक्षा मानकों का पालन कराते हुए सैलानियों को व्यवस्थित ढंग से भ्रमण कराने की एक बड़ी जिम्मेदारी होगी। इस पहल से स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।