बस्तर बाढ़ आपदा में पीड़ितों को 9.39 करोड़ से अधिक राहत राशि का भुगतान, पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर जारी
आपदा से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से अब तक कुल 9,39,29,898 करोड़ रुपए की राहत राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्ता...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 07 Oct 2026 08:37:30 PM (IST)Updated Date: Wed, 07 Oct 2026 08:38:24 PM (IST)
HighLights
- बड़ा हिस्सा मकानों की क्षतिपूर्ति के रूप में दिया गया
- पशुहानि के मामलों में 69, 500 रुपये की राहत
- पेयजल स्रोतों का अनिवार्य क्लोरीनेशन कर रहे
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। बस्तर अंचल में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से हुई मूसलाधार बारिश और ओडिशा के खातीगुड़ा व मुरान बांधों से छोड़े गए पानी के चलते उत्पन्न भीषण बाढ़ की स्थिति के बीच जिला प्रशासन ने राहत एवं पुनर्वास कार्यों को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा है।
आपदा से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से अब तक कुल 9,39,29,898 करोड़ रुपए की राहत राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।
बड़ा हिस्सा मकानों की क्षतिपूर्ति के रूप में दिया गया
जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस वित्तीय सहायता में सबसे बड़ा हिस्सा मकानों की क्षतिपूर्ति के रूप में दिया गया है, जिसके तहत कुल 8 करोड़ 78 लाख 15 हजार 398 रुपए वितरित किए गए हैं। इसमें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 8 करोड़ 2 लाख 23 हजार 391 रुपए तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 75 लाख 92 हजार 7 रुपए की सहायता शामिल है।
पशुहानि के मामलों में 69, 500 रुपये की राहत
इसके अतिरिक्त घरों में रखे बर्तन व अन्य घरेलू सामग्रियों के नुकसान के एवज में प्रभावितों को 52 लाख 45 हजार रुपये, जनहानि के मामलों में आश्रितों को 8 लाख रुपये का मुआवजा और पशुहानि के मामलों में 69 हजार 500 रुपये की राहत राशि का त्वरित भुगतान किया गया है।
पुनर्वास और स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रयास भी तेज
वित्तीय सहायता के साथ-साथ जमीनी स्तर पर पुनर्वास और स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रयास भी तेज गति से संचालित किए जा रहे हैं। जिन परिवारों के आशियाने पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, उनके तात्कालिक आश्रय हेतु प्रशासन द्वारा बांस, बल्ली और तिरपाल जैसी आवश्यक सामग्रियां त्वरित रूप से पहुंचाई जा रही हैं।
पेयजल स्रोतों का अनिवार्य क्लोरीनेशन कर रहे
वहीं जलभराव के बाद संक्रामक और जलजनित बीमारियों के खतरे को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मिलकर सभी पेयजल स्रोतों का अनिवार्य क्लोरीनेशन कर रहे हैं और गांवों में लगातार ब्लीचिंग पाउडर का सघन छिड़काव किया जा रहा है।