बेमेतरा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। दीपावली त्योहार में गोवर्धन पूजा संपन्न होने के बाद गांव-गांव में मड़ई-मातर का दौर शुरू होता। ग्रामीण अंचलों में यह परंपरा बनी हुई है। इस बहाने लोग आपसी मेल मुलाकात कर दीपावली पर्व की शुभकामना देते हैं व खुशियां आपस में बांटते हैं। लगभग हर गांव में यह आयोजन किया जाता है। इस आयोजन को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह भी देखने को मिलता है। राजनीतिक दलों के लोग भी इस अवसर पर उपस्थित होकर दीपावली पर्व की बधाई एवं शुभकामना देते हैं व मड़ई-मातर में अपनी सहभागिता भी निभाते हैं। सामान्यतः भाई दूज पर्व के बाद यह आयोजन किया जाता है। लगभग 15 दिनों तक इस तरह का आयोजन ग्रामीण अंचल में बड़े उत्साह के साथ किया जाता है।
मातर से जागृत होता है प्रेम और सौहार्द का भाव : योगेश
किसान नेता योगेश तिवारी विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में गोवर्धन पूजा और मातर में शामिल हुए । इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को गोवर्धन पूजा और दीपावली की शुभकामनाएं दी । विधानसभा के ग्राम सरदा, अकोली, अतरगढी, बावनलाख, भिलौरी समेत कई गांवों में मातर में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे । इस दौरान किसान नेता ने कहा कि ग्रामीणों ने आज भी अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपरा को जीवित रखा है, जो सराहनीय है। यदुवंशी इस त्योहार को बड़े धूमधाम से मनाते हैं । मातर में सभी समाज के लोग इकट्ठा होते हैं, जिससे आपसी प्रेम और सौहार्द का भाव जागृत होता है । उन्होंने कहा कि त्रेतायुग में भगवान इंद्र ने बृजवासियों से नाराज होकर मूसलाधार बारिश की थी। उस वक्त भगवान श्रीकृष्ण ने छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर बृजवासियों को बचाया था। पर्वत के नीचे भगवान श्रीकृष्ण ने सभी को सुरक्षा प्रदान की थी। तभी से भगवान श्रीकृष्ण को गोवर्धन के रूप में पूजा जाता है।