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बेमेतरा में चार परिवारों का दुखड़ा, पहले सात लाख की चोरी, अब हुक्का-पानी बंद, एसपी से फरियाद

बेमेतरा जिले के ग्राम काचरी में चोरी के मामले की बैठक में शामिल न होने पर चार परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। ग्रामीणों द्वारा आर्थिक दंड...और पढ़ें

By Kishore TiwariEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 07:52:37 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 07:54:41 PM (IST)
बेमेतरा में चार परिवारों का दुखड़ा, पहले सात लाख की चोरी, अब हुक्का-पानी बंद, एसपी से फरियाद
बेमेतरा पुलिस अधीक्षक कार्यालय से बाहर आते पीड़ित परिवार। - नईदुनिया

HighLights

  1. ग्राम काचरी के चार परिवारों ने एसपी से लगाई गुहार
  2. बैठक में शामिल न होने पर ग्रामीणों ने किया बहिष्कार
  3. पुलिस अधीक्षक ने साजा थाना प्रभारी को दिए जांच आदेश

नईदुनिया प्रतिनिधि, बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के ग्राम काचरी में चार परिवार संकट में हैं। पहले उनके घर सात लाख की चोरी हुई। चोरी का आरोपी गांव का ही निकला। उसके कबूलनामे के बाद पंचायत की पंचायत की बैठक बुलाई गई। बैठक में पीड़ित परिवार नहीं पहुंचा तो पंचायत ने तुगलकी फरमान जारी करते हुए चारों परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है।

पीड़ित परिवारों ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) के कार्यालय में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। एसपी को सौंपे गए ज्ञापन में रेखा साहू, रमेश कुमार, अर्जुन दास और कलाराम बाई ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


चोरी की घटना और बहिष्कार की शुरुआत

पीड़ित परिवारों के अनुसार, यह पूरा विवाद लगभग एक साल पुरानी एक चोरी की घटना से जुड़ा हुआ है। रेखा साहू के घर में लगभग सात लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और नकदी की चोरी हुई थी, जिसमें आरोपी ने अपना गुनाह भी कबूल कर लिया था। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा एक सामाजिक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें ये चारों परिवार किन्हीं कारणों से शामिल नहीं हो पाए थे। बैठक में अनुपस्थिति को आधार बनाकर ग्रामीणों ने इन परिवारों का सामाजिक रूप से पूर्णतः बहिष्कार कर दिया।

आर्थिक दंड और मानसिक प्रताड़ना

बहिष्कृत परिवारों का आरोप है कि ग्रामीणों ने उनके साथ हर तरह का सरोकार रखना बंद कर दिया है। स्थिति तब और बदतर हो गई जब पंचायत ने इन परिवारों से संबंध रखने वाले किसी भी व्यक्ति पर 10,000 रुपये का भारी आर्थिक दंड और इस बात की सूचना देने वाले पर भी 2,500 रुपये का जुर्माना लगाने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया। इस तरह की पाबंदियों के कारण पीड़ित परिवार लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रहे हैं, जो सीधे तौर पर भारतीय संविधान और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है।

पुलिस प्रशासन की सख्त कार्रवाई के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने त्वरित संज्ञान लिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले की जांच के लिए साजा थाना प्रभारी को आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि पीड़ितों पर लगाए गए अवैध प्रतिबंधों को जल्द से जल्द खत्म कराया जाए और समाज में इस तरह के असंवैधानिक निर्णय लेने वाले दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।