भिलाई
भिलाई की पहचान पूरे विश्व में यहां पर बनने वाली रेल पटरियों के कारण है। जिसका अब तक विश्व को 10 बार लपेटने लायक पटरियां बनाई जा चुकी है। ...और पढ़ें
By Vinita SinhaEdited By: Vinita Sinha
Publish Date: Sat, 26 Aug 2023 04:30:06 PM (IST)Updated Date: Sat, 26 Aug 2023 04:30:06 PM (IST)
भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट का स्थल निरीक्षण करने सोवियत रूस से सन् 1955 में एक दल आया था। जिसने यहां पर इसकी नींव रखी । इसके बाद 4 फरवरी 1959 में यहां पर प्रोडक्शन शुरू हुआ। भिलाई की पहचान भिलाई स्टील प्लांट के कारण है। यहां पर पहला रेलवे स्टेशन भिलाई- 3 बना था। उसके बाद पावर हाउस रेलवे स्टेशन, दुर्ग रेलवे स्टेशन बनाया गया।
भिलाई की पहचान पूरे विश्व में यहां पर बनने वाली रेल पटरियों के कारण है। जिसका अब तक विश्व को 10 बार लपेटने लायक पटरियां बनाई जा चुकी है। भिलाई मैत्रीबाग में जन्में वाइट टाइगर्स को पूरे देश के अलग-अलग जू में भेजा जा चुका है। अब तक एक दर्जन वाइट टाइगर्स भेजे जा चुके है। यहां पर शिक्षा के क्षेत्र में काफी कार्य हुआ है इसलिए भिलाई को शिक्षा धानी भी कहा जाता है।
भिलाई इस्पात संयंत्र की पहचान पूरे देश में इसलिए भी है क्योंकि यहां पर रहने वाले लोग देश के सभी प्रदेशों से आए हुए हैं। यहां से हवाई मार्ग के लिए रायपुर तक सड़क मार्ग से जाना पड़ता है। भिलाई से लगे देवबलौदा में 11 वीं शताब्दी का शिव मंदिर भी है।