
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिलाई। भिलाई नगर निगम शहर में जलभराव, अवरुद्ध जल निकासी और गिरते भूजल स्तर की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए नई पहल करने जा रहा है। निगम प्रशासन जल प्रबंधन को पूरी तरह वैज्ञानिक और डेटा आधारित स्वरूप देने की तैयारी में है। इसके तहत ड्रेनेज व्यवस्था, वर्षाजल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, पेयजल आपूर्ति और सीवरेज तंत्र को एक साथ समाहित करते हुए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। आधुनिक तकनीक की मदद से शहर के मौजूदा जल ढांचे का डिजिटल डेटाबेस बनाया जाएगा।
इस परियोजना के अंतर्गत निगम क्षेत्र के लगभग 75 से 80 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का यूएवी ड्रोन सर्वे कराया जाना प्रस्तावित है। इसके साथ ही करीब 350 किलोमीटर लंबे प्रमुख सड़क एवं ड्रेनेज कॉरिडोर का विस्तृत तकनीकी अध्ययन किया जाएगा।
इस हाई-टेक सर्वे से शहर में जल निकासी के प्राकृतिक प्रवाह, वर्तमान नालों की वहन क्षमता और वहां मौजूद रुकावटों व अतिक्रमण की स्पष्ट जानकारी मिलेगी। जलभराव वाले संवेदनशील क्षेत्रों की जीआईएस आधारित मैपिंग और जियो-टैगिंग की जाएगी, जिससे समस्याग्रस्त क्षेत्रों में प्राथमिकता से सुधारात्मक कार्य किए जा सकें।
कार्ययोजना का एक प्रमुख उद्देश्य वर्षाजल संरक्षण और भूजल रिचार्ज को गति देना है। सर्वे के माध्यम से उपयुक्त स्थलों की पहचान की जाएगी, जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, रिचार्ज वेल और रिचार्ज पिट जैसी संरचनाएं स्थापित की जा सकें। इसके अलावा जीआईएस मैपिंग के जरिए पेयजल लाइनों और सीवरेज नेटवर्क के संभावित क्रॉस-कनेक्शन या लीकेज की पहचान होगी, जिससे पानी के संदूषण को रोका जा सके। निगम द्वारा चिन्हित 24 बोरवेल सहित अन्य जलस्रोतों के नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण कर गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।
निगम आयुक्त सुरुचि सिंह के अनुसार शहर की जल व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुकूल बनाने के लिए सभी घटकों को एकीकृत दृष्टिकोण से देखना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अलग-अलग नालों के सुधार के बजाय फील्ड डेटा, ड्रोन चित्रों और जीआईएस मैपिंग के विश्लेषण से वैज्ञानिक समाधान निकाला जाएगा। इस डिजिटल कुंडली के आधार पर होने वाले विकास कार्यों से भिलाई को जलभराव से राहत मिलेगी और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुदृढ़ होगी।