भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र-बीएसपी ने राजनांदगांव जिले की दुलकी खदान में लौह अयस्क का खनन शुरू कर दिया है। अब अगला लक्ष्य कांकेर की लौह अयस्क खदान कलवर-नागुर है। पहले चरण में यहां सालाना दस लाख टन लौह अयस्क का खनन किया जाएगा। 938 हेक्टेयर खदान क्षेत्र में से महज 17 हेक्टेयर पर ही खनन शुरू किया जाएगा।
अगले वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में इसका खनन शुरू करने के लिए खदान विभाग सक्रिय हो चुका है। कलवर-नागुर खदान को दल्ली-राजहरा खदान के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय से खनन की अनुमति मिल चुकी है। अब राज्य सरकार से भी अनुमति मिलने वाली है। इसके बाद पेड़ों की कटाई और खनन शुरू किया जाएगा। भारतीय इस्पात प्राधिकरण-सेल की सबसे बड़ी इकाई भिलाई इस्पात संयंत्र इस वक्त उच्च गुणवत्तायुक्त लौह अयस्क की कमी से जूझ रहा है।
इस्पात उत्पादन की लागत को कम करने के लिए सस्ते दर पर लौह अयस्क की जरूरत है। दल्ली-राजहरा खदान में गुणवत्तायुक्त लौह अयस्क की कमी है। सेल की दूसरी खदान से भी ऊंची दर लौह अयस्क खरीदना पड़ रहा है। इससे कुछ हद तक बचने के लिए कलवर-नागुर सार्थक साबित होगी।
काफी हद तक बीएसपी का खर्च बचाएगा खदान
कांकेर जिले की कलवर-नागुर खदान में एक मिलियन टन लौह अयस्क का खनन किया जाएगा। पर्यावरणीय स्वीकृति मिल चुकी है। बीएसपी को 10 मिलियन टन लौह अयस्क की जरूरत है। लौह अयस्क की मांग और आपूर्ति में आ रहे अंतर को भरने कलवर-नागुर खदान काफी हद तक सहायक साबित होगा। रावघाट खदान अब तक चालू नहीं हुआ है। राजहरा में उच्च गुणवत्तायुक्त लौह अयस्क की कमी है।
सेल के रा-मटेरियल डिविजन-आरएमडी से ऊंचे दर पर लौह अयस्क हर माह खरीदना पड़ रहा है। कलवर-नागुर में खनन चालू होने के बाद काफी हद तक हर माह हो रहे नुकसान की भरपाई की जा सकेगी।
यहां तो कीमत से ज्यादा देते हैं मालभाड़ा
भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारी बता रहे हैं कि उच्च गुणवत्तायुक्त लौह अयस्क की जरूरत को पूरा करने के लिए आरएमडी से हर माह करीब एक लाख टन माल मंगाया जाता है। 1200 रुपये प्रति टन मालभाड़ा ही दिया जाता है। बीएसपी स्वयं के खदान में खनन करने और उसे भिलाई पहुंचाने तक प्रति टन करीब 1100 रुपये खर्च करता है। यहां उत्पादन से ज्यादा मालगाड़ा पर राशि खर्च हो रहा है। इससे बचने के लिए बीएसपी ने अपनी खुद की खदान दुलकी और कलवर-नागुर पर फोकस किया है।
इन आंकड़ों को भी जानिए
938.05ः हेक्टेयर खदान कलवर-नागुर में बीएसपी को आवंटित
17ः हेक्टेयर खदान क्षेत्र पर बीएसपी करेगा प्रथम चरण में खनन
63ः फीसद कलवर-नागुर में है आयरन ओर की गुणवत्ता
7.8ः मिलियन टन आयरन ओर का खनन पिछले साल दल्ली- राजहरा में हुआ
14ः एमटी आयरन ओर से करीब साढ़े 7 एमटी इस्पात बनता है
4.82ः मिलियन टन इस्पात का उत्पादन बीएसपी ने पिछले साल किया
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अगले वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में कलवर-नागुर में उत्पादन चालू करने की तैयारी है। आयरन ओर के मामले में पीछे चल रहे थे, अब आत्मनिर्भर हो जाएंगे। दल्ली-राजहरा में उच्च गुणवत्तायुक्त लौह अयस्क की कमी है। आरएमडी के मटेरियल को मिलाकर यहां उत्पादन को बहाल रखा जा रहा है। कलवर में हर साल एक मिलियन टन खनन की तैयारी है। इसके बाद इसका दायरा बढ़ता जाएगा।
-सुबीर दरिपा, महाप्रबंधक-जनसंपर्क विभाग-बीएसपी