
महेन्द्र कुमार साहू, नईदुनिया, दुर्ग। जिला मुख्यालय से नौ किमी दूर ग्राम जेवरा सिरसा के कुम्हार बस्ती में इन दिनों घर के आंगन, कमरे और छत पर मिट्टी के बने दीये ही नजर आ रहे हैं। परिवार के पुरुष ही नहीं महिला और बच्चे भी चाक से दीये बनाने के काम में लगे हुए हैं। सुबह से लेकर देर रात तक परिवार के अधिकांश सदस्य दीये बनाने का ही काम करते हैं। इनके बनाए दीये दुर्ग-भिलाई के बाजार में खप जाता है। इनका यह भी दावा है कि त्योहार सीजन में करीब चार करोड़ दीयों की बाजार में खपत होती है। इन कुम्हारों से दीया खरीदने दुर्ग और भिलाई के ही व्यापारी जाते हैं।
करीब दस हजार आबादी वाले जेवरा सिरसा गांव में 175 कुम्हार परिवार हैं जो दीये बनाने का काम करते हैं। गणेशोत्सव के बाद से ही दीये बनाने का काम शुरू हो गया है। 175 कुम्हार परिवार में से अधिकांश परिवार ऐसे हैं जहां चार से पांच चाक में दीया बनाया जाता है। पांच चाक से दिनभर में दस हजार दीये तैयार कर लिया जाता है। मनोज कुंभकार के घर में उनकी पत्नी, बेटे-बहू सहित पांच लोग इस काम में लगे हुए हैं। मनोज के मुताबिक उसे 25 लाख दीयों का आर्डर मिला था जिसे वे भेज चुके हैं।
मनोज ने बताया कि उनका परिवार सालभर दीये बनाने का काम करता है। उन्होने बताया कि दीये का ऑर्डर देने भिलाई-दुर्ग से ही व्यापारी आते हैं और वे दुर्ग-भिलाई के बाजार में ही दीये बेचते हैं। इस गांव में मनोज कुंभकार की तरह और कई परिवार हैं जिसके घर के सभी सदस्य(बच्चों को छोड़कर) दीये बनाने में लगे हुए हैं। करीब 25 परिवार ऐसे हैं जो सालभर मिट्टी के दीये, कलश, मटका, करवा, नांदी,ज्योत कलश, जांता-पोरा बनाने का काम करते हैं।
मनोज कुंभकार के यहां दीया खरीदने पहुंचे भिलाई के व्यापारी सुरेश चंद्र ने बताया कि वे पिछले 42 साल से दीया खरीदने के लिए इस गांव में आ रहे हैं। उनके अलावा भिलाई के कई व्यापारी यहां दीयों की खरीदकारी करने अलग-अलग कुंभकारों के पास आते हैं। उन्होंने बताया कि पोरा त्योहार से दीयों का बाजार शुरू हो जाता है जो देव उठनी एकादशी तक चलता है। बड़ी व छोटी दीवाली, छठ और देव दीपावली में भी दीयों की बड़ी संख्या में बिक्री होती है।
धमधा नाका दुर्ग निवासी तुलसी राम ढीमर ने 35 हजार दीयों का आर्डर दिया था जिसे वे गुरुवार को लेने पहुंचे। तुलसी राम ने बताया कि हर साल दीपावली त्योहार पर वे दीया बेचने का काम करते हैं। इस सीजन में वे करीब 50 हजार दीये बेच डालते हैं। कुंभकार समाज के संरक्षक सतीश कुंभकार ने बताया कि बस्ती में रहने वाले कुम्हार परिवार के सदस्य त्योहारी सीजन में दीये बनाने का ही काम करते हैं। दुर्ग-भिलाई के बाजार में ही करीब चार करोड़ दीयों की खपत हो जाती है।