
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिलाई। दुर्ग केंद्रीय जेल से पैरोल पर बाहर गए पांच कैदी निर्धारित समय पूरा होने के बाद भी जेल वापस नहीं लौटे। ये सभी गंभीर अपराधों में सजा काट रहे थे और इनमें ज्यादातर को आजीवन कारावास की सजा मिली हुई है।
पैरोल की अवधि खत्म होने के बाद भी वापस नहीं आने पर संबंधित थानों में धारा 229(A) के तहत कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजा गया है। एक साथ पांच कैदियों के फरार होने से पैरोल पर छूटने वाले कैदियों की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
जेल रिकॉर्ड के अनुसार पैरोल से वापस नहीं लौटने वाले कैदियों में अजय पाटिल, जसपाल सिंह, कृष्ण कुमार उर्फ दाउराम, विक्की उर्फ विशाल और नहुस भारती शामिल हैं।
अजय पाटिल हत्या के मामले में रानीतराई थाना क्षेत्र से पैरोल पर गया था। जसपाल सिंह हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले में भिलाई नगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। कृष्ण कुमार उर्फ दाउराम अपहरण के मामले में मोहन नगर थाना क्षेत्र का है। विक्की उर्फ विशाल हत्या सहित गंभीर धाराओं में छावनी थाना क्षेत्र से संबंधित है। वहीं नहुस भारती हत्या के मामले में पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र से जुड़ा है। रिकॉर्ड के अनुसार ये मामले वर्ष 2011 से 2024 के बीच के हैं।
पैरोल जेल में सजा काट रहे कैदी को तय समय के लिए अस्थायी रूप से बाहर रहने की अनुमति है। यह सजा माफ होना नहीं है। सामान्य तौर पर गंभीर बीमारी, परिवार में मृत्यु, विवाह या अन्य विशेष पारिवारिक या मानवीय परिस्थितियों में नियमों के तहत पैरोल दी जाती है।
पैरोल देने से पहले कैदी का जेल में आचरण, अपराध की प्रकृति, पिछला रिकॉर्ड और अधिकारियों की रिपोर्ट देखी जाती है। पैरोल कैदी का अधिकार नहीं है। सक्षम प्राधिकारी नियमों के आधार पर फैसला लेते हैं। गंभीर अपराधों में भी पात्रता और प्रतिबंधों को देखा जाता है।
पैरोल मिलने के बाद कैदी को सभी शर्तों का पालन करना होता है। इसमें तय पते पर रहना, जरूरत पड़ने पर थाने में हाजिरी लगाना और अवधि खत्म होने पर तय तारीख को जेल वापस पहुंचना शामिल है। पैरोल कितने दिन की होगी, यह नियमों और अधिकारी के आदेश से तय होता है। विशेष स्थिति में अवधि बढ़ाने के लिए अलग से अनुमति लेनी पड़ती है।
पैरोल की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जेल वापस नहीं लौटने वाले सभी पांच कैदियों की जानकारी छत्तीसगढ़ समेत देशभर के संबंधित पुलिस थानों और इकाइयों को भेज दी गई है। कैदियों के फोटोग्राफ भी साझा किए गए हैं, ताकि उनकी पहचान और तलाश में मदद मिल सके। सभी फरार कैदियों के खिलाफ नियमानुसार दोबारा अपराध दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है।
-विजय अग्रवाल , एसएसपी दुर्ग