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आईआईटी भिलाई की स्थानीय उद्योगों को मजबूत बनाने की पहल, रिवर्स इंजीनियरिंग से सिखाएगा आयातित कलपुर्जे बनाना

बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और आइआइटी भिलाई के सहयोग से भिलाई इस्पात संयंत्र में प्रयुक्त आयातित कलपुर्जों के स्वदेशी विकल्प तैयार किए जाएंगे। ...और पढ़ें

By T Surya RaoEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 08:50:22 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 08:52:24 AM (IST)
आईआईटी भिलाई की स्थानीय उद्योगों को मजबूत बनाने की पहल, रिवर्स इंजीनियरिंग से सिखाएगा आयातित कलपुर्जे बनाना
आईआईटी भिलाई निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश के साथ बीएसपी एंसिलरी एसोसिएशन के पदाधिकारी। - एंसिलरी

HighLights

  1. आईआईटी भिलाई तकनीक से स्थानीय उद्योग होंगे सशक्त
  2. आयातित कलपुर्जों के स्वदेशी विकल्प बनाएगा रिवर्स इंजीनियरिंग
  3. एंसिलरी और एमएसएमई उद्योगों में बढ़ेंगे रोजगार अवसर

नईदुनिया प्रतिनिधि, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) सहित देश भर के इस्पात संयंत्रों में उपयोग होने वाले महंगे आयातित कलपुर्जों का निर्माण अब स्थानीय स्तर पर संभव होगा। बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और आईआईटी भिलाई ने रिवर्स इंजीनियरिंग तकनीक के जरिए इन पुर्जों के स्वदेशी विकल्प विकसित करने की दिशा में संयुक्त पहल की है। इस साझेदारी से स्थानीय एंसिलरी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को आधुनिक तकनीकी संबल मिलेगा, विदेशों से आयात पर निर्भरता घटेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।

इस रणनीतिक सहयोग को लेकर आईआईटी भिलाई परिसर में संस्थान प्रबंधन और बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के मध्य बैठक संपन्न हुई। बैठक में 'मेक इन इंडिया' और 'विकसित भारत' के संकल्प के तहत स्थानीय औद्योगिक इकाइयों को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।


उद्योगों को देंगे हरसंभव सहायता

आइआइटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने भरोसा दिलाया कि संस्थान अपनी उन्नत प्रयोगशालाओं, अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से उद्योगों को हरसंभव सहयोग देगा ताकि महत्वपूर्ण कलपुर्जे यहीं निर्मित हो सकें।

3डी स्कैनिंग और अत्याधुनिक प्रयोगशाला से जांच

रिवर्स इंजीनियरिंग की यह पूरी प्रक्रिया शुरुआती चरण में पेड ट्रायल के आधार पर संचालित होगी। आईआईटी भिलाई के अत्याधुनिक 3डी स्कैनर, उन्नत सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर एडेड डिजाइनिंग की मदद से कलपुर्जों की मूल संरचना और बारीकियों का विश्लेषण किया जाएगा। संस्थान की अत्याधुनिक प्रयोगशाला में सामग्री की रासायनिक संरचना और टिकाऊपन की जांच होगी। जांच रिपोर्ट और मटेरियल टेस्ट सर्टिफिकेट के आधार पर स्थानीय उद्योग अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर सकेंगे।

स्थानीय उद्योगों और युवाओं को मिलेगी मदद

एसोसिएशन के अध्यक्ष रतन दासगुप्ता ने कहा कि स्थानीय एंसिलरी इकाइयां जटिल कलपुर्जे बनाने की क्षमता रखती हैं और आइआइटी के सहयोग से इस क्षमता का पूरा दोहन होगा। शीघ्र ही बीएसपी उच्च प्रबंधन, एसोसिएशन और आइआइटी के बीच त्रिपक्षीय बैठक होगी। बैठक में संस्थान के विशेषज्ञ डा. सौम्या गंगोपाध्याय, डा. योगेश, डा. पुरेंदू दास तथा उद्योग प्रतिनिधि उमेश चितलांग्या, पीसी लालवानी, डी. राय चौधरी और तापस दासगुप्ता मौजूद रहे।

ये होती है रिवर्स इंजीनियरिंग

रिवर्स इंजीनियरिंग किसी निर्मित उत्पाद, मशीन या कलपुर्जे की आंतरिक संरचना, डिजाइन और कार्यप्रणाली को समझने की वैज्ञानिक तकनीक है। इसमें उत्पाद को अलग-अलग हिस्सों में खोलकर अथवा 3डी स्कैनिंग द्वारा उसकी सामग्री, रासायनिक संरचना और निर्माण प्रक्रिया का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाता है, जिससे उसका सटीक स्वदेशी प्रारूप तैयार किया जा सके।