
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिलाई दुर्ग जिले के छह से अधिक सरकारी छात्रावासों में छात्र-छात्राओं ने बदहाल व्यवस्था और कथित अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्र-छात्राओं ने बारिश के बीच मालवीय चौक पर प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। उनका कहना है कि छात्रावासों में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं। छात्रों ने जिले के सभी छात्रावासों की व्यवस्थाओं के साथ ही निर्माण और मरम्मत के नाम पर खर्च की गई सरकारी राशि की जांच कराने की मांग की। इसके अलावा भोजन भत्ते को 1200 रुपए से बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिमाह करने की मांग भी उठाई।
छात्रों की प्रमुख मांग भोजन भत्ते में बढ़ोतरी की है। उनका कहना है कि वर्तमान में प्रत्येक विद्यार्थी को भोजन के लिए प्रतिमाह 1200 रुपये दिए जाते हैं। महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल है।
इसलिए इसे बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह किया जाए। छात्रों ने यह भी कहा कि कालेजों में सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के कारण पूरे 12 महीने पढ़ाई होती है, जबकि छात्रावासों में केवल 10 महीने का ही भोजन भत्ता मिलता है। शेष दो महीने विद्यार्थियों को भोजन की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ती है। उन्होंने पूरे 12 महीने भोजन भत्ता देने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों ने बताया कि कई छात्रावासों के भवनों की हालत खराब है। लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। शौचालयों में साफ-सफाई और जरूरी सुविधाओं का अभाव है। ओबीसी गर्ल्स छात्रावास की छात्राओं ने बताया कि उन्हें खुले स्थान पर नहाना पड़ता है। विद्यार्थियों ने टेबल, कुर्सी, पलंग, चादर, झाड़ू, पोछा, लाइट और पंखे जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
बारिश के दौरान परिसर में पानी भरने की समस्या दूर करने के लिए ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त करने की भी मांग की गई। छात्रों ने छात्रावासों में कंप्यूटर, वाई-फाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की। इसके अलावा खेल सामग्री, वाटर प्यूरीफायर, ठंडे पानी की व्यवस्था और मेस में टेबल-कुर्सियां लगाने की मांग भी रखी।
विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक साल से छात्रावासों में कोई बड़ा निर्माण या मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है, जबकि रखरखाव के नाम पर सरकारी राशि खर्च की गई है। उन्होंने निर्माण और मरम्मत कार्यों में खर्च की गई राशि की जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के बीच आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त अविनाश श्रीवास मौके पर पहुंचे और विद्यार्थियों का ज्ञापन लिया। सहायक आयुक्त अविनाश श्रीवास ने कहा कि विद्यार्थियों की मांगें बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हैं। गर्मी की छुट्टियों के कारण पहले 10 महीने का भोजन खर्च दिया जाता था। अब सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के बाद 12 महीने भोजन भत्ता देने की मांग पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि छात्रावासों में वार्डन की नियुक्ति की प्रक्रिया राज्य स्तर से होनी है। शिक्षकों के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।