
नईदुनिया न्यूज, बीजापुर। कांकेर जिले में पिछले एक माह में मलेरिया से पांच स्कूली बच्चों की मौत के बाद अब बीजापुर में भी एक आश्रम छात्र की मौत ने बस्तर में मलेरिया नियंत्रण और आश्रम-छात्रावासों में बच्चों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांगला बालक आश्रम में कक्षा पांचवीं में पढ़ने वाले लस्कर वेट्टी की सोमवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। वह गंभीर हालत में डिमरापाल स्थित बलिराम कश्यप मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती था। चिकित्सकों के अनुसार छात्र गंभीर मलेरिया से पीड़ित था और संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच गया था।
लस्कर वेट्टी पिता प्रमोद वेट्टी, ग्राम हितुलवाड़ा, तहसील भैरमगढ़ का रहने वाला था। वह जांगला स्थित बालक आश्रम में रहकर पढ़ाई कर रहा था। स्वजन के अनुसार उसे करीब एक सप्ताह से बुखार था। आरोप है कि आश्रम प्रबंधन ने बीमारी की गंभीरता की जानकारी समय पर स्वजन को नहीं दी।
शुक्रवार शाम करीब सात बजे परिजनों को बुलाकर छात्र को घर भेजा गया। इसके बाद परिजन उसे बीजापुर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर यहां से उसे डिमरापाल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने आश्रम अधीक्षक संदीप टोप्पो की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि यदि समय रहते बीमारी की जानकारी दी जाती और छात्र को अस्पताल पहुंचाया जाता तो उपचार पहले शुरू हो सकता था। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है। हालांकि आश्रम प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।
मलेरिया से बच्चों की मृत्यु का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कांकेर जिले में पिछले दिनों स्कूली बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य विभाग के साथ आदिम जाति कल्याण विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। अब बीजापुर की घटना ने इस सवाल को और गंभीर कर दिया है कि आश्रमों में रहने वाले बच्चों के बुखार और मलेरिया की निगरानी कितनी प्रभावी है।
बच्चा कई दिन तक बुखार में रहने के बाद गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे, तो शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान और उपचार व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बस्तर संभाग में जनवरी 2025 से 20 जुलाई 2026 तक 34,006 मलेरिया धनात्मक प्रकरण सामने आए हैं। इनमें बीजापुर सबसे ऊपर है। जिले में इस अवधि में 12,339 मलेरिया धनात्मक प्रकरण मिले हैं। इनमें 10,597 पीएफ, 1,328 पीवी और 414 मिक्स मामले शामिल हैं।
ऐसे में बीजापुर जैसे सर्वाधिक प्रभावित जिले में आश्रम-छात्रावासों में बच्चों की नियमित जांच और बुखार के मामलों की तत्काल निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान और स्वस्थ्य बस्तर अभियान के तहत छह साल में बस्तर संभाग के सात जिलों में करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद मलेरिया से मौतों का अनुक्रम थमा नहीं है। कांकेर में पांच स्कूली बच्चों की मौत ने आश्रम-छात्रावासों में स्वास्थ्य व्यवस्था और विभागों के बीच समन्वय पर सवाल खड़े किए हैं।
मलेरिया नियंत्रण के लिए दवा छिड़काव, मेडिकेडेट मच्छरदानियों और स्क्रीनिंग पर भी करोड़ों खर्च हुए, लेकिन दवा की आपूर्ति नहीं होने से इस वर्ष कई जिलों में छिड़काव शुरू नहीं हो सका है।
(जनवरी 2025 से 20 जुलाई 2026 तक)
कुल मलेरिया धनात्मक प्रकरण: 34,006
पीएफ: 29,120
पीवी: 3,710
मिक्स: 1,126
सबसे अधिक मामले: बीजापुर- 12,339
दूसरे स्थान पर: सुकमा-5,742
तीसरे स्थान पर: दंतेवाड़ा-4,638