आदिवासी दिवस पर भी महसूस हुई सिलगेर की तपिश
गंगालूर गांव में विश्व आदिवासी दिवस पर प्रस्तुत गीतों के माध्यम से युवाओं ने सिलगेर गोलीकांड की जांच और महिलाओं पर अत्याचार के मसले उठाए। ...और पढ़ें
By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Wed, 11 Aug 2021 07:24:20 AM (IST)Updated Date: Wed, 11 Aug 2021 07:24:20 AM (IST)

बीजापुर। गंगालूर गांव में विश्व आदिवासी दिवस पर प्रस्तुत गीतों के माध्यम से युवाओं ने सिलगेर गोलीकांड की जांच और महिलाओं पर अत्याचार के मसले उठाए। यहां फोर्स के कैंपों को बंद करने की मांग भी की। गंगालूर में बाजार स्थल पर आसपास के गांवों से हजारों लोग आए थे।
कार्यक्रम में युवाओं ने पारंपरिक वेषभूषा में नृत्य पेश किया। इस नृत्य के जरिए युुवाओं ने आदिवासियों पर होने वाले अत्याचार की बात उठाते कहा कि फर्जी केस में आदिवासियों को जेल में बंद करना बंद किया जाए। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि हम आदिवासी लता की तरह हैं। लेकिन हमें पेड़ों की तरह बनना है। यानि हमें किसी भी सहारे के बिना बढ़ना है। जब तक हम शिक्षित नहीं होंगे, हमें अधिकार नहीं मिल सकता हैं। उन्होंने कहा कि पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची आदिवासी हित में बने हैं।
समूचे बस्तर में पांचवीं अनुसूची लागू है। लेकिन इसका पालन नहीं हो पा रहा है और काफी हद तक हमारे जनप्रतिनिधि भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। सभा में मुख्य रूप से पांडूराम तेलम, हरिकृष्ण कोरसा, कामेश्वर दुब्बा, अमित कोरसा, नरेंद्र हेमला, गुज्जा राम पवार, बुधराम साहनी, दिलीप उइके, तारकेश्वर पैंकरा, गंगाधर मांझी, आदिनारायण पुजारी एवं अन्य मौजूद थे।
छत्तीसगढ़ में 42 जनजातियां
वक्ताओं ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सभा के फैसले पर विश्व आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है। दुनिया में तीन हजार से ज्यादा जनजातियां रहती हैं और अकेले छत्तीसगढ़ में 42 जनजातियां हैं। आज का दिन सिर्फ भाषण के लिए नहीं है। बल्कि आज का दिन आदिवासियों के उत्थान के तरीके पर मंथन करने का है।
दखल का प्रावधान नहीं
वक्ताओं ने कहा कि आदिवासियों की अलग प्रथाएं हैं और इन पर किसी को भी दखल देने का अधिकार नहीं है। आदिवासी ना तो हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई या किसी धर्म के नियमों पर नहीं चलता है। उसकी अपनी परंपरा है। आदिवासी प्रकृतिवादी होते हैं। वे पेरमा और गायता के अनुसार चलते हैं। जहां तक बलि सरीखी कुप्रथाएं हैं, इन्हें काफी पहले खत्म कर दिया गया है।