• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बीजापुर

नक्सल भय पर भारी पड़ा विकास... 4 दशक बाद पहली बार बीजापुर के दारेली गांव पहुंचा प्रशासन, संपन्न हुई जनगणना

लंबे समय तक नक्सली प्रभाव और खौफ के साए में जीने के कारण विकास की मुख्यधारा से कटा रहा बीजापुर जिले का सुदूरवर्ती 'दारेली' गांव, अब बदलाव और आपसी विश्...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 20 May 2026 08:14:08 PM (IST)Updated Date: Wed, 20 May 2026 08:14:08 PM (IST)
नक्सल भय पर भारी पड़ा विकास... 4 दशक बाद पहली बार बीजापुर के दारेली गांव पहुंचा प्रशासन, संपन्न हुई जनगणना
नक्सल भय पर भारी पड़ा विकास

HighLights

  1. चार दशक बाद पहली बार बीजापुर के सुदूर दारेली गांव पहुंचा प्रशासन
  2. नक्सली खौफ को पीछे छोड़ गांव में पहली बार संपन्न हुआ जनगणना का काम
  3. ग्रामीणों के दस्तावेज दुरुस्त करने के लिए गांव में ही लगेगा शिविर

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। लंबे समय तक नक्सली प्रभाव और खौफ के साए में जीने के कारण विकास की मुख्यधारा से कटा रहा बीजापुर जिले का सुदूरवर्ती 'दारेली' गांव, अब बदलाव और आपसी विश्वास की एक नई इबारत लिख रहा है। पिछले चार दशकों (40 साल) से इस क्षेत्र में कोई भी प्रशासनिक गतिविधि नहीं हो सकी थी। स्थिति यह थी कि यह गांव वर्ष 2011 की राष्ट्रीय जनगणना से भी पूरी तरह वंचित रह गया था। लेकिन अब इतिहास बदलते हुए पहली बार जिला प्रशासन की टीम सीधे दारेली गांव पहुंची और वहां सुचारू रूप से जनगणना का कार्य संपन्न कराया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं अब उन सुदूरवर्ती गांवों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले विकास की कल्पना करना भी बेहद कठिन था।


प्रशासनिक अमले का ऐतिहासिक दौरा और आत्मीय स्वागत

इसी कड़ी में कलेक्टर बीजापुर विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे, जनगणना प्रभारी अधिकारी मुकेश देवांगन तथा उसूर एसडीएम भूपेंद्र गावरे ने दारेली गांव का सघन दौरा किया। प्रशासनिक अधिकारियों को अपने बीच पाकर ग्रामीणों ने उनका आत्मीय और भावुक स्वागत किया। ग्रामीणों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज उन्हें पहली बार यह महसूस हुआ है कि शासन-प्रशासन उनके द्वार तक पहुंचा है। इस दौरान गांव में हुए जनगणना कार्य को ग्रामीणों ने एक ऐतिहासिक और सुखद पहल बताया।

विशेष शिविर लगाकर बुनियादी दस्तावेज बनाने के निर्देश

कलेक्टर बीजापुर ने गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और जमीन के पट्टे, जरूरी पहचान पत्र, बैंक खाते तथा राशन कार्ड जैसे अनिवार्य दस्तावेजों की उपलब्धता की समीक्षा की। इस दौरान कई ग्रामीणों के दस्तावेज अपूर्ण पाए गए, जिस पर कलेक्टर ने मातहत अधिकारियों को निर्देशित किया कि गांव में जल्द ही एक विशेष शिविर का आयोजन किया जाए, ताकि सभी पात्र ग्रामीणों का शत-प्रतिशत दस्तावेजीकरण (सैचुरेशन) सुनिश्चित हो सके।

मौके पर ही लिया संवेदनशील संज्ञान

भ्रमण के दौरान एक स्थानीय किसान ने कलेक्टर को अपनी व्यथा सुनाई कि उसके पिता के निधन के बाद भी लंबे समय से जमीन का नामांतरण (म्यूटेशन) नहीं हो पाया है। इस पर संवेदनशीलता दिखाते हुए कलेक्टर ने मौके पर ही मौजूद राजस्व अधिकारियों को नामांतरण प्रक्रिया तुरंत पूरी करने के कड़े निर्देश दिए और कहा कि वे स्वयं इस मामले की निगरानी करेंगे। प्रशासन की इस त्वरित कार्यप्रणाली को देखकर किसान भावुक हो गया और उसने अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

जनकल्याणकारी योजनाओं और छात्रवृत्ति की घोषणा

कलेक्टर ने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शासन की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ग्राम पंचायत दारेली के सभी स्कूली बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने के भी निर्देश दिए।

जो दारेली गांव कभी भय, उपेक्षा और सन्नाटे का प्रतीक माना जाता था, वह आज विकास, आपसी विश्वास और नई उम्मीदों की राह पर कदम बढ़ा चुका है। प्रशासन की इस संवेदनशील पहल ने ग्रामीणों के भीतर शासन के प्रति भरोसे को और अधिक मजबूत किया है।

यह भी पढ़ें- उज्जैन कालभैरव मंदिर में बड़ा बदलाव, अब ₹500 देकर गर्भगृह में होंगे VIP दर्शन, नई दर्शन व्यवस्था से भक्त खुश