नईदुनिया, रायपुर: बीजापुर नक्सली हमले के अगले दिन मंगलवार को शहीदों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। शहीद ड्राइवर तुलेश्वर राणा का पार्थिव शरीर गृह गांव तोकापाल ब्लॉक के आरापुर लाया गया। उन्हें श्रद्धांजलि देने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। स्थानीय मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। देखिए तस्वीरें।
इस बीच, दंतेवाड़ा के कारली पुलिस लाईन में सोमवार को बीजापुर जिले के कुटरू-बेदरे मार्ग पर ग्राम अंबेली में आईडी ब्लास्ट में शहीद जवानों को अंतिम सलामी दी गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री एवं प्रभारी मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक दंतेवाड़ा चैतराम अटामी, विधायक बीजापुर विक्रम मण्डावी सहित पुलिस एवं सीआरपीएफ के अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री साय सहित उपमुख्यमंत्री ने शहीद जवानों के शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने शहीद जवान बामन सोढ़ी के पार्थिव शरीर को कांधा देकर गृह ग्राम के लिए रवाना किया।
दिल्ली लौटने से पहले शाह ने रायपुर में गृह विभाग के अधिकारियों के साथ नक्सली अभियान को गति देने की रणनीति बनाई थी। पुलिस परेड ग्राउंड में गृहमंत्री शाह ने कहा था कि देश से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्णतः खात्मा हो जाएगा।
देश के सभी राज्यों से नक्सलवाद के खिलाफ ताबूत में अंतिम कील ठोकने की पूरी तैयारी है। उन्होंने नक्सलियों से अपील की थी कि हथियार छोड़कर मुख्य धारा में लौटें और विकास में योगदान दें। सरकार ने आत्मसमर्पण नीति बनाई है। इसमें समर्पण के बाद हर नक्सली के पुनर्वास की व्यवस्था की गई है।
इसके पहले शाह अगस्त और जनवरी 2024 में भी नक्सल विरोधी अभियान के लिए रोडमैप तैयार कर नक्सलियों के खिलाफ रणनीति बनाई थी।
पौने दो वर्ष पहले 26 अप्रैल 2023 को दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने घात लगाकर डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी)फोर्स के जवानों पर हमला किया था।
उन्होंने जवानों से भरी गाड़ी को आईआईटी हमले से उड़ाया था। हमले में 11 जवान बलिदान हुए थे। इनमें से 10 डीआरजी के जवान व एक ड्राइवर हैं। नक्सलियों ने रोड के बीचों बीच लैंडमाइन बिछाई हुई थी। यह धमाका इतना जबरदस्त था कि रोड पर गहरा गड्ढा हो गया था और जवानों के वाहन के परखच्चे उड़ गए थे।
कुटरू में सोमवार को दो विस्फोट हुए थे। पहले विस्फोट की तीव्रता कम थी। इसलिए नुकसान नहीं हुआ। इसके बाद जवानों को लेने जा रही अन्य गाड़ियों ने यू टर्न ले लिया।
काफिले में शामिल एक वाहन के ड्राइवर के अनुसार कुटरू के नजदीक सामने से आ रहे वाहन चालक ने विस्फोट में बाल-बाल बचने और फायरिंग होने की जानकारी दी थी। जैसे ही उसने आगे का घटनाक्रम सुना, तुरंत गाड़ी मोड़ दी। नैमेड थाने पहुंचे तो बड़ा ब्लास्ट होने और नौ लोगों के बलिदान की खबर आई।
प्रदेश के नारायणपुर जिले में वर्ष-2008 में डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) का गठन किया गया था। इसके बाद वर्ष-2013 में सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर में भर्तियां की गईं थी। इसमें स्थानीय युवाओं को लिया जाता है। इसमें समर्पण करने चुके नक्सलियों की भी भर्ती होती है। जब भी मुठभेड़ होती है, तो डीआरजी के जवान सबसे आगे खड़े होते हैं।