
नईदुनिया प्रतिनिधि, बीजापुर। जिले में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश ने ग्रामीण इलाकों में बच्चों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने के बाद उसूर ब्लॉक के सेमलडोडी गांव के बच्चे जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। हाथों में किताबें और पीठ पर स्कूल बैग लेकर पानी में उतरते बच्चों की तस्वीर ने प्रशासन के विकास के दावों की पोल खोल दी है।
सेमलडोडी के बच्चे रोजाना बहते पानी में नदी पार कर स्कूल जाते दिखाई दे रहे हैं। बारिश के दौरान नदी का बहाव तेज है और पानी का स्तर लगातार बढ़ा हुआ है। इस उम्र में जब बच्चों के हाथों में सिर्फ किताबें होनी चाहिए, तब उन्हें जान हथेली पर लेकर नदी पार करनी पड़ रही है। यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है।
इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के लोकसभा उपाध्यक्ष सहदेव मोरला ने भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां विकास के ढोल पीटते नहीं थकतीं, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और है। जनता दोनों दलों को अच्छी तरह जानती है और अब यह ढोंग बर्दाश्त नहीं करेगी।
सहदेव मोरला ने कहा कि सेमलडोडी के बच्चों की तस्वीर ने विकास के दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, नेताओं के लिए सड़कें और सुविधाएं तुरंत तैयार हो जाती हैं, लेकिन गरीब ग्रामीणों के बच्चों के लिए नदी पर एक पुल नहीं बन पाता। आखिर यह कैसी राजनीति और कैसा विकास है?
सहदेव मोरला ने भाजपा-कांग्रेस से सवाल पूछते हुए कहा कि सेमलडोडी के बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? बारिश के दौरान नदी पार करते समय किसी बच्चे के साथ हादसा हो जाए तो जवाबदेह कौन होगा? वर्षों के शासन के बाद भी गांव को सुरक्षित पुल या पुलिया क्यों नहीं मिल सकी? चुनावी वादों के अलावा ग्रामीण बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए धरातल पर क्या काम किया गया? क्या केवल भाषणों से पुल बनेगा या सरकार जमीन पर ठोस कार्रवाई करेगी?
सहदेव मोरला ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि अब जनता को सिर्फ भाषण और आश्वासन नहीं चाहिए, जनता को सड़क, पुल और अपने बच्चों की सुरक्षित शिक्षा का अधिकार चाहिए। बच्चों की सुरक्षा किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
एक भी बच्चे की जान जोखिम में नहीं पड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ग्रामीणों और बच्चों के बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को सड़क से लेकर सदन तक उठाती रहेगी। जिस व्यवस्था में बच्चे स्कूल जाने के लिए नदी में उतरने को मजबूर हों, उस व्यवस्था को अपने विकास के दावों पर आत्ममंथन करना चाहिए।