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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 19, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

‘पति को खोने का गम तो है, लेकिन...' IED ब्लास्ट में शहीद जवान की गर्भवती पत्नी के शब्द सुनकर जवानों की आंखें हुईं नम

IED Blast: दिनेश नाग और उनके भाई ने कम उम्र में माता-पिता को खोने के बाद कठिनाइयों का सामना करते हुए पढ़ाई पूरी की और पुलिस विभाग में भर्ती होकर परिवा...और पढ़ें

By Anup SrivastavaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Tue, 19 Aug 2025 08:20:39 AM (IST)Updated Date: Tue, 19 Aug 2025 08:21:28 AM (IST)
‘पति को खोने का गम तो है, लेकिन...' IED ब्लास्ट में शहीद जवान की गर्भवती पत्नी के शब्द सुनकर जवानों की आंखें हुईं नम
IED Blast Martyred soldier's wife: विलाप करती शहीद जवान की पत्नी पूजा नाग।

HighLights

  1. माओवादियों से लड़ते हुए बलिदान हुए।
  2. अंतिम विदाई में मिला गार्ड ऑफ ऑनर।
  3. साथी जवानों की आंखें हुई नम।

नईदुनिया न्यूज, बीजापुर: जिले के भोपालपटनम अनुभाग के उल्लूर घाटी के चिल्लामरका जंगल में हुए आइईडी ब्लास्ट में बलिदान हुए डीआरजी जवान दिनेश नाग को सोमवार को उनके गृहग्राम बीजापुर नयापारा में गमगीन माहौल के बीच अंतिम विदाई दी गई। भारी बारिश के बावजूद सैकड़ों ग्रामीण, गणमान्य नागरिक, पुलिस अधिकारी, जवान और भाजपा पदाधिकारी उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

शहीद का शव देख परिजनों का बुरा हाल

बलिदानी दिनेश नाग का पार्थिव शरीर जब अंतिम संस्कार स्थल पहुंचा, तो स्वजन और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। उनकी गर्भवती पत्नी पूजा नाग और नौ वर्षीय पुत्र प्रियांश नाग का रो-रो कर बुरा हाल था। वहीं बड़े भाई उमेश नाग, जो स्वयं पुलिस विभाग में प्रधान आरक्षक के पद पर कार्यरत हैं, अपने छोटे भाई को खोने के गम में टूट गए।


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जांबाज जवानों में होती थी दिनेश की गिनती

दिनेश नाग ने 2016-17 में आरक्षक पद पर नौकरी ज्वाइन की थी। उनकी कर्तव्यनिष्ठा और बहादुरी को देखते हुए उन्हें DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप) में तैनात किया गया। उन्होंने कई बार माओवादियों से लोहा लिया और अनेक मुठभेड़ों में अपनी वीरता दिखाई। साथियों के मुताबिक, दिनेश हमेशा सबसे आगे रहकर दुश्मनों का सामना करते थे और उनकी गिनती जांबाज जवानों में होती थी। बताया जाता है कि हाल ही में उन्हें प्रधान आरक्षक पद पर पदोन्नति के लिए चयनित भी किया गया था।

'मुझे अपने पति पर गर्व है'

शहीद की पत्नी पूजा नाग ने अश्रुपूरित आंखों से कहा ‘पति को खोने का गम अवश्य है, लेकिन वे देश सेवा करते हुए बलिदान हुए, इस पर मुझे गर्व है। वे हमेशा बहादुर और निडर इंसान रहे।’

नौकरी लगी तो परिवार का सहारा बने

दिनेश नाग और उनके भाई ने कम उम्र में माता-पिता को खोने के बाद कठिनाइयों का सामना करते हुए पढ़ाई पूरी की और पुलिस विभाग में भर्ती होकर परिवार का सहारा बने। अंतिम संस्कार के दौरान जब गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया तो मौजूद जवानों की आंखें भर आईं। बीजापुर ने आज एक सच्चे वीर सपूत को खो दिया, लेकिन दिनेश नाग की शहादत हमेशा माओवाद विरोधी संघर्ष को नई ऊर्जा देती रहेगी।

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