माओवादियों का प्रभाव खत्म, अब चार दशक बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ की दहाड़ सुन पाएंगे पर्यटक
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व लगभग 40 साल बाद एक नवंबर 2026 को पर्यटकों के लिए फिर से खुलने जा रहा है। एनटीसीए के नियमों ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 04:02:31 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 04:04:17 PM (IST)
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में टाइगर सफारी की प्रतीकात्मक तस्वीर। एआईHighLights
- इंद्रावती टाइगर रिजर्व लगभग 40 साल बाद पर्यटकों के लिए खुलेगा
- यह अभयारण्य छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के बस्तर क्षेत्र में स्थित है
- पर्यटकों के लिए यह पर्यटक गंतव्य एक नवंबर 2026 से उपलब्ध होगा
नईदुनिया प्रतिनिधि, बीजापुर। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर क्षेत्र के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व लगभग 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। इलाके से माओवाद के खत्म होने के बाद यह रिजर्व 1 नवंबर 2026 को आधिकारिक रूप से पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। इस ऐतिहासिक पहल का मुख्य उद्देश्य वन्यजीव प्रेमियों को एक नया और रोमांचक विकल्प प्रदान करने के साथ-साथ बस्तर की अनूठी जनजातीय संस्कृति और विरासत से रूबरू कराना है।
छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडेय ने बताया कि रिजर्व को फिर से खोलने की तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। नई सफारी गाड़ियों की खरीद की जा रही है और पर्यटकों के लिए नए मार्गों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के टाइगर कंजर्वेशन प्लान के अनुसार ही पर्यटन क्षेत्रों और सफारी मार्गों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि, प्रतिदिन आने वाले पर्यटकों और वाहनों की अधिकतम संख्या यानी वहन क्षमता (कैरींग कैपिसिटी) का निर्धारण अभी किया जाना बाकी है।
जैव विविधता और वन्यजीव संपदा
वर्ष 1983 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' के तहत स्थापित यह रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए देश भर में प्रसिद्ध है। यह अभयारण्य बाघों, तेंदुओं, सुस्त भालुओं, गौर, जंगली सुअर, नीलगाय और ढोल (जंगली कुत्तों) का प्राकृतिक आवास है। इसके अलावा, यहां जंगली एशियाई भैंसों की एक छोटी लेकिन पारिस्थितिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण आबादी भी निवास करती है। हाल ही में इंद्रावती नदी के पास 25 वर्षों में पहली बार चिकने कोट वाले ऊदबिलाव (स्मूथ-कोटेड ओटर्स) देखे गए हैं, जो यहां के पारिस्थितिकी तंत्र के सुधार को दर्शाता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिजर्व के खुलने से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। होमस्टे, गाइड सेवाओं और पारंपरिक हस्तशिल्प की बिक्री से बस्तर क्षेत्र की आर्थिकी को एक मजबूत संबल मिलेगा। एक तरफ जहां वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ देश-विदेश के पर्यटकों को छत्तीसगढ़ के अनछुए प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से देखने का दुर्लभ अवसर प्राप्त होगा।
छत्तीसगढ़ के टाइगर रिजर्व
छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान में चार प्रमुख टाइगर रिजर्व अधिसूचित हैं, जो अपनी समृद्ध जैव विविधता और विशाल क्षेत्रफल के लिए जाने जाते हैं।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व: बस्तर के बीजापुर जिले में फैला यह राज्य का सबसे बड़ा रिजर्व है, जिसका कुल क्षेत्रफल 2,799.07 वर्ग किलोमीटर है (कोर क्षेत्र 1,258.37 वर्ग किमी और बफर क्षेत्र 1,540.70 वर्ग किमी)।
अचानकमार टाइगर रिजर्व: बिलासपुर और मुंगेली जिलों में स्थित इस रिजर्व का कुल क्षेत्रफल लगभग 914.02 वर्ग किलोमीटर है।
उदंती- सीतानदी टाइगर रिजर्व: गरियाबंद जिले में स्थित इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 556.12 वर्ग किलोमीटर है।
गुरु घासीदास-तमोर पिंसला टाइगर रिजर्व: कोरिया और सूरजपुर जिलों में फैला यह राज्य का सबसे नवीनतम और प्रमुख टाइगर रिजर्व है।