
नईदुनिया प्रतिनिधि, बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से माओवादी हिंसा का दौर आधिकारिक रूप से समाप्त होने की घोषणा के बावजूद, जंगलों में छिपाया गया विस्फोटकों का जखीरा सुरक्षा बलों के लिए अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। ताजा मामले में, बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र अंतर्गत पुजारीकांकेर के जंगलों में सुरक्षा बलों ने एक भारी मात्रा में डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की है। बरामद डेटोनेटरों की संख्या 955 हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के अनुसार, बरामद किए गए 455 इलेक्ट्रिक और 500 नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटरों का इस्तेमाल कर माओवादी लगभग 1000 आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) तैयार कर सकते थे। इतनी बड़ी संख्या में आईईडी का विस्फोट बस्तर के एक बड़े हिस्से को दहला सकता था और इससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है।
यह बरामदगी इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ठीक एक दिन पहले ही पास के कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों से 711 बैरल ग्रेनेड लांचर (बीजीएल) सेल बरामद किए गए थे। लगातार दो दिनों में सामने आए विस्फोटकों के ये बड़े जखीरे यह स्पष्ट करते हैं कि माओवादियों ने अपने वर्चस्व वाले दौर में जंगलों को हथियारों और विस्फोटक सामग्री के विशाल भंडार के रूप में इस्तेमाल किया था। अब जबकि संगठन की सशस्त्र मौजूदगी समाप्त हो चुकी है, इन पुराने और छिपे हुए ठिकानों को ढूंढना सुरक्षा बलों के लिए कठिन परीक्षा है।
पुलिस के अनुसार, 204 कोबरा बटालियन से मिली जानकारी के आधार पर, जिला बल और कोबरा की एक संयुक्त टीम ने पुजारीकांकेर के दक्षिण-पूर्व दिशा में पहाड़ी और जंगली क्षेत्र में सर्चिंग अभियान चलाया। इसी दौरान जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया यह संदिग्ध डंप बरामद हुआ।
डेटोनेटर के अलावा, मौके से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी मिले हैं, जिनमें मल्टीमीटर, रेडियो सेट बैटरी चार्जर कप, कॉपर प्रोटोटाइपिंग बोर्ड (पीसीबी), यूएसबी पोर्ट कार्ड रीडर, मोबाइल चार्जर, लैपटॉप एडाप्टर, एंटीना और रिले कंट्रोल सर्किट बोर्ड शामिल हैं। इसके अलावा माओवादी साहित्य भी बरामद किया गया है। फ़िलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है।