
बीजापुर(निप्र)। जिला बनने के सात साल बाद भी सस्ता एवं सुलभ न्याय पाने से यहां के निवासी दूर हैं। बीजापुर में 10 साल पहले जेल भवन बनाया गया है लेकिन आज तक राज्य शासन द्वारा कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई है।
व्यवहार न्यायालय में विचाराधीन बंदियों को दंतेवाडा एंव जगदलपुर से प्रकरणों में उपस्थिति हेतु लाया जाता है। जिले के निवासियों को विचारण एंव सुनवाई के लिए जिला एवं सत्र न्यायालय दंतेवाड़ा में उपस्थित होना पडता है। प्रति वर्ष औसतन 100 से 150 प्रकरण जिले के 18 थानों से पंजीबद्ध होते हैं। इनका विचारण दंतेवाडा में होता है।
जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर यात्रा कर गवाहों को सत्र प्रकरणों में गवाही हेतु दंतेवाड़ा जाना पडता है। नक्सलियों के बंद एंव आतंक के चलते आवागमन व्यवस्था चरमराई रहती है। गवाहों को वापस आने में तीन दिन का समय लग जाता है। मोटर दुर्घटना व्यवहार अपील तथा नियमित व्यवहार प्रकरण जो 50 हजार रुपए तक के हैं, की सुनवाई भी दंतेवाडा जिला न्यायालय में हो रही है। इससे पक्षकारों को न्याय पाने के लिये अनेक कठिनाइयों का सामना करना पडता है। अधिवक्ता संघ बीजापुर ने जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना हेतु मुख्य न्यायाधिपति उच्च न्यायालय, मुख्यमंत्री, गृह एवं जेल मंत्री को मांॅग पत्र भेजा है। प्रकरणों की सूची प्रेषित कर अधिवक्ता संघ ने मांग की है कि जिला एंव सत्र न्यायालय की स्थापना शीघ्र की जाए। इससे जिले के निवासियों को न्याय के लिये यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।
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