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छत्तीसगढ़ के बीजापुर में छह माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, 35 लाख का था इनाम

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में लाल आतंक को बड़ा झटका लगा है, जहां कुल 35 लाख रुपये के इनामी छह खूंखार नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर पुलिस के समक्...और पढ़ें

By Vinod SinghEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 03:07:17 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 03:08:58 PM (IST)
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में छह माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, 35  लाख का था इनाम
पुलिस अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करते माओवादी। - पुलिस

HighLights

  1. बीजापुर में छह इनामी माओवादियों का आत्मसमर्पण
  2. आत्मसमर्पित कैडरों में चार पीपीसीएम स्तर के माओवादी
  3. टेकलगुड़ा और सुरक्षा कैंप हमलों में थे शामिल

नईदुनिया प्रतिनिधि, बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और राज्य शासन की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर माओवादी संगठन को करारा झटका लगा है। बीजापुर पुलिस के समक्ष सोमवार को छह सक्रिय नक्सलियों ने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी छह नक्सलियों पर कुल 35 लाख रुपये का नकद इनाम घोषित था।

इनमें चार पीपुल्स पार्टी कमेटी मेंबर (PPCM) स्तर के वरिष्ठ कैडर और दो पार्टी सदस्य रैंक के सक्रिय नक्सली शामिल हैं। मुख्यधारा में लौटे कैडरों की पहचान रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पांडो पोडियम उर्फ सस्मिता, सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष, कोसा माड़वी उर्फ सतीश, देवे माड़कम उर्फ जन्नी और लल्लू ताती के रूप में हुई है।


ओड़िशा कंपनी नंबर आठ और बड़े नेटवर्क में थीं सक्रिय

बीजापुर पुलिस के अनुसार, 30 वर्षीय रानी सोढ़ी और 28 वर्षीय पांडो पोडियम ओड़िशा क्षेत्र में सक्रिय कंपनी नंबर 8 की पीपीसीएम सदस्य थीं। इन दोनों महिला कैडरों पर आठ-आठ लाख रुपये का नकद इनाम घोषित था। रानी सोढ़ी वर्ष 2012 में नाबालिग उम्र में ही संगठन में शामिल हुई थी और वह महाराष्ट्र तथा ओड़िशा में कई गंभीर नक्सली वारदातों में लिप्त रही। वह अप्रैल 2018 में ओड़िशा में मतदान दल पर हुए हमले में भी शामिल थी, जिसमें दो पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। इस वर्ष जनवरी में ओड़िशा के कोनारी जंगल में हुई मुठभेड़ के दौरान वह गोली लगने से घायल भी हुई थी। वहीं पांडो पोडियम वर्ष 2015 में संगठन से जुड़ी और पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की सशस्त्र शाखा में सक्रिय रही।

शीर्ष नेताओं की सुरक्षा और सुरक्षा कैंपों पर हमले

आठ लाख रुपये के इनामी 27 वर्षीय सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष ने वर्ष 2015 में संगठन का दामन थामा था। वर्ष 2018 में उसे ओड़िशा भेजा गया, जहां उसे शीर्ष माओवादी नेताओं की सुरक्षा का महत्वपूर्ण जिम्मा सौंपा गया था। वहीं 30 वर्षीय कोसा माड़वी कई भीषण हमलों में शामिल रहा है। वह वर्ष 2006 में एनएमडीसी के सीआईएसएफ कैंप पर हमला, वर्ष 2016 में चेरली सीआरपीएफ कैंप और वर्ष 2024 में टेकलगुड़ा सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले का मुख्य आरोपी रहा है। हालांकि, उसने इस साल जनवरी में संगठन छोड़ दिया था।

टेकलगुड़ा वारदात से लेकर एरिया कमेटी तक संलिप्तता

इसके अलावा दो लाख रुपये की इनामी 22 वर्षीय देवे माड़कम ने नवंबर 2022 से जून 2025 के बीच शीर्ष नक्सली कमांडर जगदीश इरपा उर्फ रमन्ना के सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्य किया था। वहीं एक लाख रुपये के इनामी 25 वर्षीय लल्लू ताती गंगालूर एरिया कमेटी का सदस्य था। लल्लू बचपन से ही नक्सल संगठन में जुड़ गया था और बाद में बटालियन नंबर 1 तथा पीएलजीए का हिस्सा रहा। वह अप्रैल 2021 में हुए बहुचर्चित टेकलगुड़ा हमले तथा वर्ष 2022 में एलमागुंडा और सन्नापुर सुरक्षा कैंपों पर हुए हमलों में शामिल था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत हर संभव शासकीय लाभ और पुनर्वास सुविधाएं दी जाएंगी।