
नईदुनिया प्रतिनिधि, बीजापुर। कभी माओवादियों के प्रभाव और भय के कारण राष्ट्रीय पर्व मनाना जहां ग्रामीणों के लिए मुश्किल था, उसी बीजापुर जिले के सुदूर गांवों में इस बार स्वतंत्रता दिवस पर आजादी का जश्न नई उम्मीद और उत्साह के साथ मनाया गया। आजादी के बाद पहली बार कई गांवों में तिरंगा शान से फहराया गया। तिरंगा फहरते ही ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी और गर्व साफ नजर आया।
जिले के तुमीरगुंडा और केरपे समेत करका, कुएम, मदपाल, ताड़पाला और मोसला जैसे सुदूर गांवों में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा रैली निकाली गई। ग्रामीणों ने पूरे उत्साह के साथ राष्ट्रीय पर्व में हिस्सा लिया। गांवों में जगह-जगह भारत माता की जय और देशभक्ति के नारों से वातावरण गूंज उठा।
बेदरे क्षेत्र के तुमीडपाल में ग्रामीणों के विशेष आमंत्रण पर भाजपा के पूर्व मंत्री महेश गागड़ा पहुंचे और तिरंगा फहराया। यह पल ग्रामीणों के लिए भावुक और ऐतिहासिक रहा। जिन गांवों में कभी राष्ट्रीय पर्व के आयोजन को लेकर भय का माहौल रहता था, वहां अब ग्रामीण खुले तौर पर देश का पर्व मना रहे हैं।
स्थानीय सरपंच, जनपद सदस्य और पंचों की अगुवाई में ग्रामीणों ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। तिरंगे के साथ निकली रैली ने गांवों में बदलते माहौल की तस्वीर पेश की।
ग्रामीणों के लिए यह केवल ध्वजारोहण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भय से बाहर निकलकर लोकतंत्र और राष्ट्रीय भावना से जुड़ने का प्रतीक बन गया। बीजापुर के इन सुदूर इलाकों में पहली बार खुले आसमान के नीचे लहराता तिरंगा इस बात का संकेत है कि कभी माओवाद के साये में रहे गांव अब विकास, शांति और लोकतांत्रिक जीवन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।