महासमुंद संप्रेषण गृह से 8 किशोर फरार, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान; मुख्य सचिव से मांगा जवाब
महासमुंद के शासकीय बाल संप्रेषण गृह से ग्रिल और दीवार के कांटेदार तार काटकर दुष्कर्म, चोरी व एनडीपीएस के 8 किशोरों के फरार होने पर बिलासपुर हाई कोर्ट ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 06 Aug 2026 07:23:53 AM (IST)Updated Date: Thu, 06 Aug 2026 07:33:16 AM (IST)
HighLights
- महासमुंद संप्रेषण गृह से आठ किशोर फरार, हाई कोर्ट सख्त।
- चीफ जस्टिस बेंच ने जनहित याचिका दर्ज कर माँगा हलफनामा।
- मुख्य सचिव से फरार बालकों की तलाश पर मांगी रिपोर्ट।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः महासमुंद के बाल संप्रेषण गृह से दुष्कर्म समेत विभिन्न मामलों में निरुद्ध आठ किशोरों के फरार होने की घटना को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मीडिया की खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल के डिविजन बेंच ने मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है।
कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा पेश कर फरार किशोरों की तलाश, संप्रेषण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया है।
खबर के अनुसार महासमुंद बाल संप्रेषण गृह में निरुद्ध आठ किशोर तड़के खिड़की की लोहे की ग्रिल तोड़कर बाहर निकले। इसके बाद करीब 12 फीट ऊंची बाहरी दीवार पर लगे कांटेदार तार को काटकर फरार हो गए। फरार किशोरों में एक दुष्कर्म, दो चोरी, तीन आबकारी अधिनियम और दो एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामलों में निरुद्ध थे। घटना ने बाल संप्रेषण गृहों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खिड़की की ग्रिल तोड़ने और ऊंची दीवार पर लगे कांटेदार तार काटने के बावजूद सुरक्षा तंत्र को इसकी भनक नहीं लगने को अदालत ने गंभीरता से लिया। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि राज्य के अन्य किशोर न्याय गृहों से भी पूर्व में किशोरों के फरार होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।
जेजे एक्ट के उद्देश्य पर भी असर
युगलपीठ ने इस बात को महत्वपूर्ण माना कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और सुधारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना है। ऐसे संस्थानों से किशोरों का फरार होना न केवल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है, बल्कि कानून के मूल उद्देश्य और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
मुख्य सचिव दें व्यक्तिगत हलफनामा
हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें मुख्य रूप से बताया जाना है कि फरार किशोरों की तलाश के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और उन्हें पकड़ने के लिए पड़ोसी जिलों तथा ओडिशा राज्य को किस तरह सतर्क किया गया है। इसके अलावा राज्य में संचालित बाल संप्रेषण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किए जा रहे सुधारों की भी जानकारी मांगी गई है। जेजे एक्ट, 2015 के अनुरूप संस्थानों के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कार्ययोजना भी हलफनामे में प्रस्तुत करनी होगी।