
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: एक्सिस बैंक और एक्सिस सिक्युरिटीज का अधिकारी व कस्टमर सर्विस प्रतिनिधि बनकर शेयर मार्केट में निवेश से मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर सिविल लाइन क्षेत्र के युवक से 8.05 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोपितों ने पहले इंस्टाग्राम के जरिए संपर्क किया और इसके बाद अलग-अलग वाट्सअप नंबरों से बातचीत कर युवक को अपने विश्वास में लिया।
फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट और लिंक के जरिए निवेश के नाम पर रकम जमा कराई गई। शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी और आइटी एक्ट की धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सिविल लाइन क्षेत्र के व्यापार विहार स्थित श्रीराम टावर निवासी अवधेश गुप्ता (31) कोलगेट-पालमोलिव इंडिया में एरिया एग्जीक्यूटिव हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि 26 जुलाई को उनकी इंस्टाग्राम आइडी पर एक अनजान आइडी से मैसेज आया था।
संपर्क करने वाले ने खुद को एक्सिस बैंक के कस्टमर सर्विस से जुड़ा बताया और शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के जरिये अच्छा रिटर्न दिलाने की बात कही। बैंक का नाम सामने आने से अवधेश को भरोसा हो गया। इसके बाद आरोपितों ने उनका व्हाट्सअप नंबर लेकर बातचीत शुरू की।
बातचीत के दौरान उन्हें निवेश से कम समय में अधिक लाभ का भरोसा दिलाया गया। आरोपितों ने अलग-अलग व्हाट्सअप नंबरों से संपर्क बनाए रखा और एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट व लिंक उपलब्ध कराया। इसी दौरान युवक से शेयर ट्रेडिंग के साथ आइपीओ में निवेश कराने के नाम पर भी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई गई। बाद में जब उन्हें ठगी का संदेह हुआ तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की। पुलिस अब रकम जिन खातों में भेजी गई, उनकी जानकारी जुटाने के साथ इंस्टाग्राम आइडी, व्हाट्सअप नंबर और वेबसाइट के संबंध में तकनीकी जांच कर रही है।
साइबर ठगी में आरोपितों ने बैंक और वित्तीय संस्थान का नाम इस्तेमाल कर पीड़ित का भरोसा जीतने की कोशिश की। इंस्टाग्राम पर शुरुआती संपर्क के बाद बातचीत को वाट्सअप पर ले जाया गया। अलग-अलग नंबरों के इस्तेमाल से ठगों ने लगातार संपर्क बनाए रखा। निवेश की प्रक्रिया को वास्तविक दिखाने के लिए ट्रेडिंग वेबसाइट और लिंक उपलब्ध कराए गए। इसी दौरान शेयर बाजार में निवेश से बेहतर रिटर्न मिलने की बात कही गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी पहचान और डिजिटल माध्यमों का संचालन कहां से किया जा रहा था।
पुलिस की जांच का फोकस रकम के लेन-देन के साथ उन डिजिटल माध्यमों पर भी है, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया गया। जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर हुई, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही इंस्टाग्राम आइडी, व्हाट्सअप नंबर और फर्जी वेबसाइट से जुड़े तकनीकी साक्ष्य खंगाले जा रहे हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस मामले में एक से अधिक लोग शामिल हैं या नहीं। साइबर ठगी के नेटवर्क तक पहुंचने के लिए लेन-देन और डिजिटल गतिविधियों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
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