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पारिवारिक रिश्ता होना काफी नहीं, ननद-भाभी के 21 लाख के विवाद पर हाई कोर्ट ने कहा- सिविल कोर्ट जाएं

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू व जस्टिस सुषमा सावंत) ने ननद-भाभी के बीच 21 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद को वैवाहिक विवा...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 07:20:07 PM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 07:20:07 PM (IST)
पारिवारिक रिश्ता होना काफी नहीं, ननद-भाभी के 21 लाख के विवाद पर हाई कोर्ट ने कहा- सिविल कोर्ट जाएं

HighLights

  1. ननद-भाभी के 21 लाख के लेन-देन को हाई कोर्ट ने माना सिविल मामला।
  2. केवल पारिवारिक रिश्ते होने से मामला फैमिली कोर्ट के दायरे में नहीं आता।
  3. रायपुर फैमिली कोर्ट के केस खारिज करने के फैसले को रखा गया बरकरार।

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर: ननद और भाभी के बीच 21 लाख रुपये के वित्तीय लेन-देन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल पारिवारिक रिश्ता होने मात्र से कोई विवाद फैमिली कोर्ट (परिवार न्यायालय) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आ जाता।

विवाद का सीधा संबंध वैवाहिक रिश्ते या उसके अधिकारों से होना अनिवार्य है। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने रायपुर फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें ननद द्वारा दायर आवेदन को रजिस्टर करने से इनकार कर दिया गया था।


मामला रायपुर निवासी रुचि पसारी और उनकी भाभी राधिका गुप्ता से जुड़ा है। रुचि पसारी ने फैमिली कोर्ट में आवेदन देकर बताया था कि उन्होंने वर्ष 2014 से 2016 के बीच अपनी स्वयं की कमाई और 'स्त्रीधन' में से विभिन्न बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए भाभी को 47 लाख रुपये दिए थे।

यह राशि भरोसे और लोन के रूप में दी गई थी, जिसमें से 26 लाख 10 रुपये वापस मिल गए थे, जबकि 20 लाख 99 हजार 990 रुपये (लगभग 21 लाख रुपये) शेष रह गए थे। ननद ने यह बकाया रकम 12% ब्याज के साथ लौटाने तथा मानसिक प्रताड़ना के एवज में 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी।

रायपुर फैमिली कोर्ट द्वारा केस दर्ज करने से इनकार किए जाने के बाद यह अपील हाई कोर्ट पहुंची थी। डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 7(1) का हवाला देते हुए कहा कि परिवार न्यायालय को केवल उन्हीं मामलों की सुनवाई का अधिकार है जिनका सीधा संबंध पति-पत्नी या विवाह के कानूनी अधिकारों व दायित्वों से हो। ननद-भाभी का संबंध पारिवारिक जरूर है, लेकिन वित्तीय लेन-देन का यह विवाद 'वैवाहिक रिश्ते' के अंतर्गत नहीं आता, इसलिए इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट (दीवानी न्यायालय) में ही हो सकती है।