छत्तीसगढ़ में मंत्रालय में चपरासी की नौकरी का झांसा देकर 4.50 लाख की ठगी, आरोपी पर एफआईआर दर्ज
शिकायत के अनुसार 13 दिसंबर 2022 को ग्राम करगीखुर्द में आरोपी ने अपनी बहन सरिता मानिकपुरी की मौजूदगी में मुकेश से 4.50 लाख रुपये नगद लिए थे। यह रकम पिता की मृत्यु के बाद मिली सहायता राशि तथा स्वजन से उधार लेकर जुटाई गई थी।
Publish Date: Wed, 10 Jun 2026 06:43:50 PM (IST)Updated Date: Wed, 10 Jun 2026 06:45:45 PM (IST)
नौकरी का झांसा देकर 4.50 लाख की ठगी।नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। मंत्रालय में चपरासी की सरकारी नौकरी लगाने का झांसा देकर चार लाख 50 हजार रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुंगेली जिले के लालपुर थाना अंतर्गत ग्राम चंदली में रहने वाले मुकेश मानिकपुरी ने धोखाधड़ी की शिकायत की है। पीड़ित ने बताया कि पथरिया क्षेत्र के बदरा में रहने वाले रामनारायण राजपूत ने मंत्रालय में पियून की नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया था। वह वर्तमान में तिफरा, बिलासपुर में रह रहा है।
शिकायत के अनुसार 13 दिसंबर 2022 को ग्राम करगीखुर्द में आरोपी ने अपनी बहन सरिता मानिकपुरी की मौजूदगी में मुकेश से 4.50 लाख रुपये नगद लिए थे। यह रकम पिता की मृत्यु के बाद मिली सहायता राशि तथा स्वजन से उधार लेकर जुटाई गई थी।
पैसे लेने के करीब साढ़े तीन साल बाद भी न नौकरी लगी और न ही रकम लौटाई गई। बार-बार मांगने पर आरोपित टालमटोल करता रहा और बाद में पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। आवेदन के परीक्षण के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 420 भादवि के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।
तीन गवाहों के सामने हुई थी रकम की सौदेबाजी
- मुकेश मानिकपुरी ने अपने आवेदन में बताया कि 13 दिसंबर 2022 को ग्राम करगीखुर्द में आरोपित रामनारायण राजपूत ने नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाकर 4.50 लाख रुपये नगद प्राप्त किए थे।
- यह लेन-देन कथित तौर पर आरोपित की बहन सरिता मानिकपुरी की उपस्थिति में हुआ।
- मामले में रंजीत यादव, सरिता मानिकपुरी और तिरिथ राम खूंटे को गवाह बनाया गया है।
- पीड़ित का कहना है कि आरोपित लंबे समय तक नौकरी लगने का आश्वासन देता रहा, जिससे उन्हें विश्वास बना रहा।
- जब तय समय बीतने के बाद भी कोई नियुक्ति नहीं हुई तो उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी, लेकिन आरोपित टालमटोल करता रहा।
पिता की सहायता राशि और उधार से जुटाए थे रुपये
- मुकेश मानिकपुरी ने बताया कि आरोपित को दी गई 4.50 लाख रुपये की रकम उनके परिवार के लिए जीवनभर की कमाई के समान थी।
- इस राशि का एक हिस्सा उनके पिता के निधन के बाद मिली सहायता राशि से आया था, जबकि शेष रकम उन्होंने अपनी बहन से उधार लेकर जुटाई थी।
- नौकरी की उम्मीद में परिवार ने आर्थिक संकट उठाकर यह राशि दी थी।
- अब न नौकरी मिली और न ही पैसे वापस हुए, जिससे पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है।
- प्रार्थी ने पुलिस से आरोपी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम वापस दिलाने की मांग की है।