
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: हाई कोर्ट ने 833.271 किलोग्राम गांजा तस्करी के मामले में विशेष न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए गए सभी पांच आरोपितों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम जैसे कठोर कानूनों में जांच एजेंसी को कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में जब्ती, सैंपलिंग, सीलिंग और जांच में गंभीर खामियां पाई गई हैं।
डिवीजन बेंच ने कहा कि अभियोजन पक्ष इन कानूनी प्रक्रियाओं के पालन को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। ऐसे में आरोपितों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता और उन्हें संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। यह मामला तीन अक्टूबर 2021 का है, जब डीआरआइ (डायरेक्टोरेट आफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) को सूचना मिली कि आंध्र प्रदेश से उत्तर प्रदेश ले जाए जा रहे एक कंटेनर ट्रक में गांजा छिपाकर ले जाया जा रहा है। डीआरआइ टीम ने गरियाबंद जिले के तुरेंगा फारेस्ट चेक पोस्ट के पास ट्रक को रोका और 833.271 किलोग्राम गांजा बरामद करने का दावा किया।
जांच में ये मिलीं खामियां
हाई कोर्ट ने अपीलों की सुनवाई के दौरान पाया कि ट्रक को रोकने के समय कोई पंचनामा या जब्ती दस्तावेज नहीं बनाए गए। ट्रक को 160 किलोमीटर दूर रायपुर स्थित डीआरआइ कार्यालय ले जाकर जब्ती और सैंपलिंग की गई, जिससे जब्ती की विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न होता है। अदालत ने यह भी पाया कि सैंपलों के साथ आवश्यक सील का रिकार्ड सुरक्षित नहीं रखा गया था। इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपितों के खिलाफ संदेह से परे अपराध सिद्ध करने में विफल रहा है, इसलिए विशेष न्यायालय का दोषसिद्धि एवं सजा का आदेश निरस्त करते हुए सभी आरोपितों को बरी किया जाता है।
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