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17 साल छोटे युवक से करीबी और साथ रहना अपने आप में अपराध नहीं : हाई कोर्ट

शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और गर्भपात कराने के आरोप में युवक की दोषमुक्ति के खिलाफ महिला की अपील खारिज; अदालत ने कहा- अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य जरूरी

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 10:49:43 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 10:49:43 PM (IST)
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17 साल छोटे युवक से करीबी और साथ रहना अपने आप में अपराध नहीं : हाई कोर्ट
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HighLights

  1. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला की क्रिमिनल अपील को किया खारिज।
  2. आपसी करीबी और साथ रहना आपराधिक जिम्मेदारी का आधार नहीं।
  3. 17 साल छोटे युवक को दोषमुक्त रखने का आदेश बरकरार।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट किया है कि दो पक्षों के बीच आपसी करीबी और उसके बाद साथ रहना अपने आप में आपराधिक जिम्मेदारी तय करने का आधार नहीं हो सकता। इसके लिए अभियोजन को संबंधित अपराध के जरूरी तत्व पर्याप्त साक्ष्यों से साबित करने होंगे। कोर्ट ने अपने से 17 साल छोटे युवक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और गर्भपात कराने का आरोप लगाने वाली महिला की अपील खारिज कर दी। महिला ने युवक को विचारण न्यायालय से दोषमुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।

मामला चांपा क्षेत्र की एक विधवा महिला से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, उसके पति की वर्ष 2020 में मृत्यु हो गई थी। वर्ष 2021 में वह बच्चों की परीक्षा के सिलसिले में चांपा आई थी। इसी दौरान पति की खरीदी हुई जमीन पर बोरिंग कराने के काम के सिलसिले में उसकी मुलाकात आरोपी युवक से हुई। बातचीत और फोन पर संपर्क बढ़ने के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं।


महिला का आरोप था कि युवक ने उससे शादी करने का भरोसा दिलाया और 11 जून 2022 को अपने किराए के मकान में ले जाकर शादी का झांसा देकर उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। महिला ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया था कि वह गर्भवती हो गई थी और युवक के दबाव में गोलियां लेने के बाद उसका गर्भपात हुआ।

बाद में युवक ने शादी से इनकार कर दिया और उसके साथ मारपीट भी की। शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया। विचारण न्यायालय ने सुनवाई के बाद साक्ष्यों के आधार पर युवक को दोषमुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ महिला ने हाई कोर्ट में अपील दायर की।

जिरह में महिला ने स्वीकार की उम्र का अंतर और आपसी नजदीकी

अपील की सुनवाई न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास और न्यायमूर्ति सुधीर कुमार की पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने महिला की जिरह में सामने आए तथ्यों पर भी विचार किया। महिला ने स्वीकार किया था कि वह पढ़ी-लिखी है और अपने हित-अहित को समझने में सक्षम है। उसने यह भी माना कि आरोपी उससे 17 वर्ष छोटा था और वर्ष 2021 में फोन पर बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी थीं। महिला ने अपनी पिछली शादी से दो बच्चों के होने की बात भी स्वीकार की, जिनकी उम्र लगभग 19 और 16 वर्ष थी।

मारपीट और जबरन गर्भपात के आरोप साबित नहीं हुए

खंडपीठ ने पाया कि मारपीट और जबरन गर्भपात कराने के आरोप पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं हुए। अदालत के अनुसार, दोनों के बीच करीबी और उसके बाद साथ रहने की स्थिति मात्र से आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। जिन अपराधों के आरोप लगाए गए हैं, उनके आवश्यक तत्वों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य होना जरूरी है। इन्हीं आधारों पर हाई कोर्ट ने युवक की दोषमुक्ति के खिलाफ महिला की अपील खारिज कर दी।

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