गजब का सिस्टम: रिटायरमेंट के पांच साल बाद भी विभागीय जांच की फाइल पेंडिंग, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने PHE सचिव से मांगा शपथ पत्र
सेवानिवृत्ति के पांच साल बाद भी विभागीय जांच की फाइल लंबित रखने पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के सचिव से शपथ पत्र मा...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 05:54:24 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 05:54:24 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- 2024 और 2025 में सरकार को भेजी गई रिपोर्ट पर अब तक अंतिम फैसला नहीं।
- जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच में हुई इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई।
- दो सप्ताह बाद वाले सप्ताह में होगी मामले की अगली सुनवाई, मांगा गया स्पष्टीकरण।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी जीएन रामटेके की विभागीय जांच को लेकर राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है। रामटेके 31 दिसंबर 2021 को अधिवार्षिकी आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति से पहले शुरू हुई विभागीय जांच की फाइल अब तक अंतिम निर्णय के लिए लंबित है।
खास बात यह है कि विभागीय जांच में उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त किए जाने की रिपोर्ट 23 जुलाई 2024 को सरकार को भेजी गई थी। आपत्तियों पर विचार के बाद 4 जुलाई 2025 को नई रिपोर्ट भी भेज दी गई। इसके बावजूद अंतिम आदेश जारी नहीं होने पर हाई कोर्ट ने पीएचई विभाग के सचिव को शपथ पत्र दाखिल कर देरी का कारण बताने कहा है।
याचिकाकर्ता जीएन रामटेके की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार केशरवानी और जूही अंगूरिया ने पैरवी की। 31 अगस्त 2026 की सुनवाई में अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि रामटेके 31 दिसंबर 2021 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके विरुद्ध सेवानिवृत्ति से पहले शुरू की गई विभागीय जांच अब तक पूरी नहीं हुई है। इस पर हाई कोर्ट ने पुरानी कार्यवाही का रिकार्ड और जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद 16 सितंबर को राज्य की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जांच में रामटेके को सभी आरोपों से दोषमुक्त पाया जा चुका है। इसकी रिपोर्ट 23 जुलाई 2024 को राज्य सरकार को भेजी गई थी। आपत्तियों पर विचार के बाद 4 जुलाई 2025 को ताजा रिपोर्ट भी भेज दी गई, लेकिन अंतिम आदेश अभी सरकार के स्तर पर प्रक्रिया में है।
2022 में भी कोर्ट ने मांगा था रिकार्ड
इस मामले में हाई कोर्ट ने 14 नवंबर 2022 को राज्य सरकार को रामटेके के विरुद्ध शुरू की गई विभागीय कार्यवाही का रिकार्ड पेश करने का निर्देश दिया था। 31 अगस्त 2026 की सुनवाई में कोर्ट के सामने यह बात आई कि उस आदेश का पालन नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को विभागीय जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे और संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने कहा था।
सचिव से पूछा- रिपोर्ट के बाद भी अंतिम आदेश क्यों नहीं?
16 सितंबर की सुनवाई में राज्य की ओर से स्पष्ट किया गया कि रामटेके जांच में दोषमुक्त हो चुके हैं और उनकी दोषमुक्ति संबंधी रिपोर्ट दो बार सरकार को भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद अंतिम निर्णय लंबित है। इस पर जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। सचिव को यह स्पष्ट करना होगा कि 23 जुलाई 2024 और 4 जुलाई 2025 की रिपोर्ट के बावजूद अब तक अंतिम आदेश क्यों पारित नहीं किया गया। मामले को दो सप्ताह बाद वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।