चेक में साइन के बाद बढ़ा दिए अंक, लाखों का वारे-न्यारे, ऑडिट में खुला बिलासपुर के बैंक प्रबंधक का खेल
बिलासपुर जिले की गुमा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में 3.38 लाख रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्राधिकृत अधिकारी राजकुमार बरगाह के हस्...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 05:59:07 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 05:59:07 PM (IST)
शिकायतकर्ता राजकुमार बरगाहHighLights
- गुमा सहकारी समिति में चेक में अंक बढ़ाकर 3.38 लाख का गबन।
- ऑडिट में खर्च बिल गायब मिलने पर खुली जालसाजी की पोल।
- समिति व बैंक प्रबंधक पर आरोप, फोरेंसिक जांच की मांग।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: सहकारी समिति में भ्रष्टाचार का एक नया कारनामा सामने आया है, जहां चेक पर स्वीकृत राशि के आगे अंक बढ़ाकर लाखों रुपये के वारे-न्यारे कर दिए गए। गुमा सेवा सहकारी समिति में कूटरचना कर 3.38 लाख रुपये के गबन किया गया है। समिति के प्राधिकृत अधिकारी राजकुमार बरगाह ने कलेक्टरेट व एसपी कार्यालय पहुंचकर पूरे फर्जीवाड़े के दस्तावेज अफसरों को सौंपे हैं।
सहकारिता के जरिए किसानों के भरोसे पर किस कदर डाका डाला जा रहा है, इसका ताजा प्रमाण गुमा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में देखने को मिला है। यहां समिति के प्राधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर के बाद चेक के अंकों में हेरफेर कर अधिक रकम आहरित कर ली गई। पीडि़त राजकुमार बरगाह के अनुसार अलग-अलग खर्चों के नाम पर 51,900 रुपये, 1,82,080 रुपये और 80,150 रुपये के तीन चेक काटे गए थे।
आरोप है कि इन चेकों में आगे अंक जोड़कर इन्हें क्रमशः 89,900 रुपये, 2,82,080 रुपये और 2,80,150 रुपये बना दिया गया। इस शातिराना खेल के जरिए कुल 3,38,000 रुपये अतिरिक्त निकाल लिए गए। जब समिति का आडिट हुआ तो खर्च का कोई वाउचर नहीं मिला और सीधे गबन पकड़ा गया। मामले में समिति के प्रबंधक शरद कुमार कश्यप सहित जिला सहकारी बैंक शाखा बिल्हा के प्रबंधक लक्ष्मण कौशिक व सुपरवाइजर हितेश सलूजा पर गबन करने का आरोप लगाते हुए राजकुमार बरगाह ने कलेक्टर संजय अग्रवाल व एसएसपी रजनेश सिंह से शिकायत की गई है।
मामले में बैंक के सीसीटीवी फुटेज और भुगतान से जुड़े वाउचर जब्त कर चेक की फोरेंसिक जांच कराने की मांग भी की गई है। बाक्स आडिट में खुली पोल, नहीं मिले खर्च के बिल समिति में चल रहे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ वर्ष 2025-26 के वार्षिक आडिट के दौरान हुआ। समिति के बैंक खाते से निकाली गई भारी-भरकम राशि का जब मिलान किया गया, तो दफ्तर में खर्च से जुड़े बिल ही गायब थे। आडिट आपत्ति दर्ज होने के बाद यह साफ हो गया कि संस्था में वित्तीय गड़बड़ी की गई है।