कलेक्टर से आईजी तक लगाई गुहार, पोते और PNB मैनेजर ने हड़पी 7.25 लाख की कमाई, सड़कों पर बुजुर्ग
बिलासपुर में 85 वर्षीय उमाशंकर दुबे के साथ उनके नामिनी पोते प्रशांत दुबे और PNB बैंक के शाखा प्रबंधक ने मिलकर 7.25 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। खाते की जमा पूंजी और पेंशन गायब होने के बाद जब बैंक ने उनके साथ अभद्रता की, तो पीड़ित बुजुर्ग कलेक्टर व पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचे। न्याय न मिलने पर वे अब सड़कों पर पर्चे बांटकर संघर्ष कर रहे हैं।
Publish Date: Sun, 06 Sep 2026 10:24:09 PM (IST)Updated Date: Sun, 06 Sep 2026 10:24:09 PM (IST)
पीड़ित उमाशंकर दुबे कलेक्टर परिसर मेंHighLights
- बिलासपुर के 85 वर्षीय बुजुर्ग उमाशंकर दुबे से 7.25 लाख की ठगी।
- PNB मैनेजर और पोते पर मिलीभगत कर एफडी हड़पने का आरोप।
- न्याय न मिलने पर सड़कों पर पर्चे बांट रहे बुजुर्ग उमाशंकर दुबे ।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः जिस पोते को बुजुर्ग ने अपने बुढ़ापे का सहारा समझकर बैंक खाते और एफडी में नामिनी बनाया था, आज उसी पर उनकी जीवनभर की कमाई हड़पने का आरोप है। 85 वर्षीय उमाशंकर दुबे इन दिनों न्याय की तलाश में शहर की सड़कों पर पर्चे बांटने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि बैंक में जमा लाखों रुपये और पेंशन राशि गायब होने के बाद वे पाई-पाई के मोहताज हो गए हैं।
न्याय नहीं मिलने से आहत बुजुर्ग अब अपनी पीड़ा जनता तक पहुंचाकर मदद की गुहार लगा रहे हैं। उमाशंकर दुबे का पंजाब नेशनल बैंक में पिछले करीब 20 वर्षों से खाता संचालित है। उनके अनुसार बैंक में पांच लाख रुपये की फिक्स डिपाजिट थी, जिसमें पोता प्रशांत दुबे नामिनी था।
बचत खाते में भी करीब दो लाख रुपये और दिसंबर माह की 25 हजार रुपये की पेंशन राशि जमा थी। बुजुर्ग का कहना है कि पोते ने बैंक के शाखा प्रबंधक और एक पूर्व फौजी रिटायर कैशियर की मिलीभगत से कुल 7.25 लाख रुपये निकाल लिए। पीड़ित के मुताबिक जब वे अपनी पेंशन और खाते की जानकारी लेने बैंक पहुंचे तो टालमटोल किया गया।
बाद में जानकारी मिली कि पेंशन का भुगतान दर्शाया जा चुका है। हिसाब मांगा तो उनसे अभद्रता की गई और बैंक से बाहर निकाल दिया गया।
कलेक्टर से लेकर पुलिस अफसरों तक लगाई गुहार
अपनी जमा पूंजी वापस पाने बुजुर्ग लाठी टेकते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। एसडीएम, एसपी और आइजी कार्यालय में भी लिखित शिकायत दी है। उनका कहना है कि उम्र के इस पड़ाव में उन्हें न्याय के लिए हर दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, लेकिन अब तक राहत नहीं मिली है।
लोगों को कर रहे सतर्क
निराशा के बीच उमाशंकर दुबे ने अपनी लड़ाई को सार्वजनिक करने का फैसला लिया है। वे शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर पर्चे बांटकर लोगों को अपनी आपबीती बता रहे हैं। पर्चों में उन्होंने पूरे मामले का उल्लेख करते हुए नागरिकों से ऐसे मामलों में सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही वरिष्ठ नागरिक संरक्षण नियमों के तहत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपनी जमा पूंजी वापस दिलाने की मांग की है।