बिलासपुर तहसील कार्यालय की नकल शाखा में मनमानी चरम पर, चक्कर काटने को मजबूर पक्षकार
बिलासपुर तहसील कार्यालय की नकल शाखा में आवेदन गायब होने और मनमानी का मामला सामने आया है। अधिवक्ता नवीन यादव ने कलेक्टर से शिकायत कर बताया कि लिपिकों क...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 11 Sep 2026 05:18:37 PM (IST)Updated Date: Fri, 11 Sep 2026 05:18:37 PM (IST)
बिलासपुर तहसील कार्यालयHighLights
- नायब तहसीलदार के लिपिकों ने कहा नकल भेज दी।
- लेकिन शाखा में गायब मिला आवेदन।
- सरकारी दस्तावेजों के रख-रखाव पर बड़ा सवाल।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः तहसील कार्यालय की नकल शाखा में राजस्व रिकार्ड की सत्यापित प्रति हासिल करने के लिए अधिवक्ताओं और आम पक्षकारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शाखा में बैठे लिपिकों की लापरवाही और टालमटोल के रवैये से परेशान होकर जिला न्यायालय के अधिवक्ता नवीन यादव ने कलेक्टर से लिखित शिकायत कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित अधिवक्ता ने बताया कि आवेदक ने प्रकरण क्रमांक 202509072500016/अ-27 रसीद क्रमांक 6765/26 के तहत, राजस्व रिकार्ड की सत्यापित प्रति के लिए विधिवत आवेदन दिया था। तय समय पर नकल शाखा पहुंचने पर हर बार समय बढ़ाकर पक्षकार को लौटा दिया गया। जब नायब तहसीलदार विनिता शर्मा के लिपिकों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने नकल को नकल शाखा भेजने की बात कही। वहीं, नकल शाखा में जानकारी लेने पहुंचे पर कर्मचारी ने बताया गया कि प्रकरण की प्रति नहीं आई है और मूल आवेदन ही गुम हो गया है।
हैरानी की बात यह रही कि जब आवक-जावक रजिस्टर की जांच करने को कहा गया, तो लिपिक ने साफ कह दिया कि इसका कोई रजिस्टर ही संधारित नहीं है। अधिवक्ता ने बताया कि इस संबंध में 15 जुलाई को अनुविभागीय अधिकारी और तहसीलदार को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
नकल की सत्यापित प्रति समय पर न मिलने से पक्षकारों के प्रकरणों में अनावश्यक विलंब हो रहा है और वे उच्च न्यायालय या अन्य मंचों पर समय पर अपील नहीं कर पा रहे हैं। अधिवक्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले को संज्ञान में लेते हुए जानबूझकर काम अटकाने वाले लिपिकों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि तहसील की चरमराई व्यवस्था दुरुस्त हो सके।
आवक-जावक रजिस्टर तक नहीं, मनमानी पर सवाल
शाखा में आवेदनों का कोई पुख्ता रिकार्ड या आवक-जावक रजिस्टर नहीं होने से यह सवाल उठ रहा है कि सरकारी दस्तावेजों का रख-रखाव किस आधार पर किया जा रहा है। लिपिकों द्वारा आवेदन गुम होने का बहाना बनाकर पक्षकारों को महीनों तक भटकाया जाता है, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
अपील का अधिकार हो रहा प्रभावि त
न कल नहीं मिलने का सीधा असर न्याय प्रक्रिया पर पड़ रहा है। सत्यापित प्रति के अभाव में पक्षकार समय रहते अपील या पुनरीक्षण याचिका दाखिल नहीं कर पाते। समयसीमा समाप्त होने का खतरा हमेशा बना रहता है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर आम जनता और उनके पैरवीकारों को भुगतना पड़ता है।