बिलासपुर। अमलाई रेलवे स्टेशन में क्षेत्रीय रेल प्रबंधक की मेमू ट्रेन की चपेट में आने से मौत के मामले रेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां पर नान-इंटरलाकिंग का काम चल रहा था, वहां अंधेरा था। इधर चालक ने बयान दिया है कि वहां से गुजरते समय कुछ टकराने की आवाज आई है। गार्ड को देखने के लिए बोला पर ट्रैक पर कुछ नहीं था। बिलासपुर पहुंचने के बाद चालक को हादसे की जानकारी दी गई। इसके बाद उन्हें सारनाथ एक्सप्रेस से वापस अमलाई बुला लिया गया। रात में सेफ्टी काउंसलर के सामने बयान में यह बात सामने आई।

घटना गुरुवार की शाम 19:45 बजे की है। बैकुंठपुर में पदस्थ क्षेत्रीय रेल प्रबंधक योगेंद्र सिंह भाटी(आइआरटीएस) की कटनी-बिलासपुर मेमू ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। उनके पास शहडोल का भी प्रभार था। इसीलिए वे गुरुवार को अमलाई रेलवे स्टेशन आए थे। इसी दौरान अमलाई स्टेशन यार्ड किमी नंबर 882/ 15-21 डाउन लाइन पर 08478 कटनी-बिलासपुर मेमू लोकल ट्रेन आ गई और क्षेत्रीय रेल प्रबंधक भाटी उस ट्रेन की चपेट में आ गए। वह सामने से ट्रेन की चपेट में नहीं आए है, बल्कि किनारे से उन्हें चोट आई। यही वजह है कि चालक को इस घटना की जानकारी नहीं मिली।

कुछ टकराने की आवाज जरूरी सुनाई दी। जिस पर चालक ने गार्ड को जानकारी देकर पीछे ट्रैक पर देखने के लिए कहा। गार्ड ने देखा पर कोई नजर नहीं आया। लिहाज ट्रेन बिना ठहरे गुजर गई। चालक व गार्ड दोनों घटना से अंजान थे। उन्हें तब जानकारी मिली जब ट्रेन बिलासपुर पहुंची और उनके पास अधिकारी पहुंचे। उन्हें बिलासपुर से वापस सारनाथ एक्सप्रेस में अमलाई बुलाया गया। रात में ही उनका सेफ्टी काउंसलर के सामने बयान हुआ।

इसमें उन्होंने इसकी जानकारी दी। चालक ने ही यह जानकारी दी की घटना स्थल के पास लाइटिंग की कोई व्यवस्था नहीं थी। इसलिए उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इस जानकारी के बाद यह तो तय हो गया है कि रेलवे की लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ है। कभी चाहे जो भी ट्रैक पर बिजली की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। इससे चालकों को सामने का अंदाजा लग जाता है और वे हार्न देते हुए गुजरते हैं। इस मामले में जीआरपी भी जांच कर रही है।

मेमू में होती यह कमी

मेमू ट्रेन में एक बड़ी कमी है, जिसे लेकर रेल प्रशासन ने कभी गंभीरता नहीं लिया। दरअसल इस ट्रेन में केवल एक चालक होता है। वही परिचालन से लेकर आजू-बाजू देखने व अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करता है। जबकि अन्य ट्रेनों में चालक के अलावा सहायक चालक भी होते हैं।

घटना की जांच करने पहुंचे रेलवे बोर्ड सदस्य

इस घटना के बाद रेलवे बोर्ड में हड़कंप मचा हुआ है। बड़ा हादसा है और कहीं न कहीं चूक हुई। इसकी जांच और जोन व मंडल के अधिकारियों से चर्चा करने के लिए मेंबर आपरेशन एंड बिजनेस डेवलपमेंट ट्रैफिक संजय कुमार मोहंती पहुंचे हैं। शनिवार की सुबह घटना स्थल की जांच करेंगे। इसके मद्देनजर महाप्रबंधक, मंडल रेल प्रबंधक समेत जोन व मंडल के तमाम उच्चाधिकारी अमलाई में ही ठहरे हुए हैं।

रात में डीआरएम, सुबह महाप्रबंधक पहुंचे

घटना की सूचना मिलते ही डीआरएम आलोक सहाय रात में अमलाई के लिए रवाना हो गए थे। वहीं शुक्रवार की सुबह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक आलोक कुमार समेत सीसीएम, सीओएम समेत अन्य अन्य अफसर स्वचलित निरीक्षण यान से अमलाई पहुंचे। मृत रेल अफसर का बुढ़ार में अंतिम संस्कार हुआ। इसमें सभी महाप्रबंधक से लेकर सभी अधिकारी शामिल हुए। बाद में उन्होंने घटना स्थल का निरीक्षण भी किया। इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ, इसे लेकर जांच की।

15 से 30 किमी की गति

घटना की सही वजह अब तक अस्पष्ट है। एक वजह को लेकर जोन व मंडल कार्यालय में काफी चर्चा है। जिस ट्रेन की चपेट में एआरएम आए हैं, उसकी गति 30 किमी प्रतिघंटे थी। जबकि कुछ दिन पहले तक यह नियम था कि नान इंटरलाकिंग कार्य के दौरान ट्रेनें 15 किमी की गति से गुजरेंगी। आपरेटिंग विभाग के अफसरों ने माललदान व समयबद्धता के चलते गति बढ़ा दी।

Posted By: Abrak Akrosh

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